बारिश बनी काल: बिजली, करंट और आसमानी कहर ने ली 5 जिंदगियां, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायपुर/कवर्धा/बलरामपुर।
छत्तीसगढ़ में सक्रिय हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून ने जहां एक ओर किसानों के लिए राहत की उम्मीद जगाई है, वहीं दूसरी ओर लापरवाही, अव्यवस्था और प्राकृतिक जोखिमों के मेल ने कई परिवारों को गहरे मातम में धकेल दिया है। गुरुवार और शुक्रवार को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हुई बारिश से जुड़ी घटनाओं में पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई—इनमें एक पिता-पुत्र, एक मासूम बालक और एक मां-बेटी शामिल हैं।
सबसे हृदयविदारक घटना कवर्धा (कबीरधाम) जिले के बिरनपुर कला गांव में सामने आई, जहां खेत की रखवाली के लिए लगाए गए कथित अवैध बिजली करंट ने दो जिंदगियां निगल लीं। 55 वर्षीय किसान गोकरण पटेल और उनका 22 वर्षीय पुत्र परमेश धान बोने के लिए खेत पहुंचे थे। इसी दौरान परमेश का हाथ खेत के चारों ओर लगाए गए करंटयुक्त तार से छू गया। बेटे को बचाने की कोशिश में पिता भी उसकी चपेट में आ गए।
दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। देर शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने खोजबीन की, तब खेत में दोनों के शव पड़े मिले—एक ऐसा मंजर जिसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया।
इसी जिले के नागाटोला-मठपुर गांव में एक और लापरवाही ने मासूम की जान ले ली। आठ वर्षीय श्रवण बैगा खेलते समय बिजली खंभे से जुड़े अर्थिंग तार के संपर्क में आ गया, जो कथित रूप से करंट प्रवाहित कर रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि यह गंभीर लापरवाही बिजली विभाग की है। घटना के बाद पुलिस और विभागीय अमले ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसे खुले खतरे पहले क्यों नहीं चिन्हित किए गए।
उधर बलरामपुर जिले में आसमानी बिजली ने एक परिवार को उजाड़ दिया। 33 वर्षीय मंती टेकाम और उनकी 14 वर्षीय बेटी विमला खेत में काम कर रही थीं। अचानक तेज बारिश और आंधी के बीच दोनों ने एक पेड़ के नीचे शरण ली, लेकिन यही निर्णय उनके लिए घातक साबित हुआ। तेज गर्जना के साथ गिरी बिजली ने दोनों की मौके पर ही जान ले ली।
इन घटनाओं के बीच मौसम विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण अगले पांच दिनों तक पूरे छत्तीसगढ़ में व्यापक बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना बनी रहेगी। विशेषकर मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि
– आंधी-तूफान के दौरान घर के भीतर ही रहें
– पेड़ों और बिजली खंभों के नीचे शरण लेने से बचें
– खुले तारों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें
सवाल जो जवाब मांगते हैं
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं केवल प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं, बल्कि कई मामलों में मानवीय लापरवाही का भी संकेत हैं।
– खेतों में अवैध करंट फैलाने की प्रवृत्ति
– बिजली विभाग की निगरानी में कमी
– ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी
ये सभी कारक मिलकर जानलेवा साबित हो रहे हैं।
मानसून का यह दौर जहां राहत लेकर आता है, वहीं सावधानी और जिम्मेदारी की कमी इसे त्रासदी में बदल देती है। जरूरत है कि प्रशासन सख्ती से नियमों का पालन कराए और आमजन भी सतर्कता को प्राथमिकता दें—ताकि बारिश जीवन दे, न कि उसे छीन ले।
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