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रायगढ़ में फ्लाई ऐश डंपिंग पर गंभीर सवाल: बरपाली–गदगांव क्षेत्र में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर मंडराता खतरा

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़, 5 जुलाई 2026।
रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र अंतर्गत बरपाली और गदगांव के बीच बहने वाले एक प्राकृतिक नाले में कथित तौर पर फ्लाई ऐश (राख) के बड़े पैमाने पर डंपिंग का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि औद्योगिक इकाइयों और एक ठेकेदार की मिलीभगत से जलस्रोत को पाटकर उसमें औद्योगिक अपशिष्ट डाला जा रहा है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह नाला कभी आसपास के गांवों की जीवनरेखा था और पशुओं व कृषि कार्यों के लिए उपयोग में लाया जाता था। लेकिन पिछले कुछ समय से इसमें राख डंप होने के कारण पानी का रंग और गुणवत्ता पूरी तरह बदल चुकी है। लोगों का कहना है कि अब यह पानी उपयोग के लायक नहीं रह गया है और इससे बदबू भी आने लगी है।

नियमों के पालन पर उठे सवाल
मामले में यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि फ्लाई ऐश के निपटान के लिए निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाई ऐश का वैज्ञानिक तरीके से निपटान अनिवार्य होता है, अन्यथा यह मिट्टी, पानी और हवा—तीनों को प्रदूषित कर सकता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पर्यावरण संरक्षण नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के आरोप
ग्रामीणों ने पंचायत प्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बिना पर्याप्त जांच के कथित रूप से इस कार्य के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया गया। हालांकि, इस संबंध में पंचायत या संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

प्रशासन और विभागों की भूमिका पर नजर
पर्यावरण और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि पूर्व में एक आर्थिक दंड लगाया गया था, लेकिन उससे स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।

स्वास्थ्य पर संभावित असर
स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो क्षेत्र में जलजनित बीमारियों, त्वचा रोगों और श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। पशुधन पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जलस्रोत को पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।

फिलहाल प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि और जांच रिपोर्ट का इंतजार है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला न केवल पर्यावरणीय लापरवाही बल्कि जनहित से जुड़े गंभीर प्रश्न भी खड़ा करेगा।

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Amar Chouhan

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