आस्था के दरबार में उठे सवाल: बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में चढ़ावे पर कथित गड़बड़ी की जांच शुरू

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
देहरादून/रुद्रप्रयाग। देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शुमार मंदिर और एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अयोध्या स्थित में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बाद अब उत्तराखंड के इन दोनों धामों में भी चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं, जिसने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट और दावे वायरल हुए, जिनमें चढ़ावे के प्रबंधन और हिसाब-किताब में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। इन दावों के सामने आने के बाद (बीकेटीसी) हरकत में आई और तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश जारी कर दिए।
समिति के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मंदिर प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने कहा कि आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए एक अलग जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं, जो पूरे प्रकरण की पड़ताल करेगी। साथ ही, जिन कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
द्विवेदी ने उन दावों का भी खंडन किया, जिनमें एक कर्मचारी को उनका ‘निजी सचिव’ बताया जा रहा था। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति मंदिर समिति का एक नियमित सरकारी कर्मचारी है और उसे निजी सचिव बताना भ्रामक है। उन्होंने अपील की कि अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालने से बचा जाए।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। हर वर्ष करोड़ों रुपये के चढ़ावे वाले इन धामों में वित्तीय व्यवस्था को लेकर पहले भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में धार्मिक संस्थानों की कार्यप्रणाली पर अधिक बारीकी से नजर रखी जा रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आस्था के केंद्रों में पारदर्शिता केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने की मूल शर्त है। ऐसे में जांच के नतीजे न केवल आरोपों की सच्चाई सामने लाएंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि भविष्य में इस तरह की व्यवस्थाओं को किस तरह अधिक जवाबदेह बनाया जाए।
फिलहाल, सभी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह स्पष्ट करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में चढ़ावे के प्रबंधन में कोई चूक हुई है।
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