शेडों की आड़ में क्या खेल? धरमजयगढ़ में प्रशासन हरकत में, तमनार के ‘मुआवजा मॉडल’ की गूंज ने बढ़ाई चिंता

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
धरमजयगढ़ (रायगढ़)।
SECL प्रभावित दुर्गापुर–शाहपुर क्षेत्र में तेजी से खड़े हो रहे शेड निर्माण अब सिर्फ स्थानीय चर्चा का विषय नहीं रह गए हैं, बल्कि प्रशासनिक जांच का केंद्र बन चुके हैं। लगातार सामने आ रही खबरों और सवालों के बीच राजस्व अमला सक्रिय हुआ और तहसीलदार हितेश साहू अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर निर्माणाधीन और तैयार शेडों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने कई नए सवाल खड़े कर दिए। शाहपुर के अंतिम छोर पर जब टीम पहुंची तो वहां दो ट्रैक्टरों से सामग्री उतारकर शेड निर्माण जारी था। वहीं खेतों के किनारे बने कुछ शेड महज चार फीट ऊंचे पाए गए—ऐसे में उनके उपयोग और उद्देश्य को लेकर संदेह और गहरा गया है।
निर्माण जारी, उद्देश्य अस्पष्ट—प्रशासन भी उलझन में
जांच के दौरान राजस्व अधिकारियों ने पाया कि क्षेत्र में कई स्थानों पर शेड निर्माण कार्य या तो जारी है या हाल ही में पूरा हुआ है। टीम ने निर्माण स्थल, भूमि की प्रकृति और संबंधित तथ्यों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। लेकिन सबसे अहम सवाल—इन शेडों का उपयोग किस लिए किया जाएगा—का स्पष्ट उत्तर मौके पर नहीं मिल सका।
स्थानीय स्तर पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे भविष्य के मुआवजे से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे जमीन के स्वरूप बदलने की कोशिश मान रहे हैं। प्रशासन ने फिलहाल तथ्यों के सत्यापन और निर्माण की वैधानिकता की जांच शुरू कर दी है।

तमनार का ‘मॉडल’ फिर चर्चा में
धरमजयगढ़ के इस घटनाक्रम ने तमनार क्षेत्र की उस पुरानी कहानी को भी फिर से जीवित कर दिया है, जहां इसी तरह शेड निर्माण और फार्म हाउस जैसे ढांचों के आधार पर मुआवजा प्राप्त करने का कथित खेल सामने आया था। उस समय भी अधिग्रहण प्रक्रिया से पहले बड़े पैमाने पर निर्माण कर मुआवजे का दावा किया गया था, जिस पर बाद में विवाद और जांच की स्थिति बनी थी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि धरमजयगढ़ में भी उसी पैटर्न पर निर्माण हो रहा है, तो यह केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं बल्कि एक संगठित प्रवृत्ति का संकेत हो सकता है।
रिपोर्ट पर टिकी निगाहें, कार्रवाई की संभावना
सूत्रों के अनुसार, समाचार पत्रों में लगातार प्रकाशित खबरों के बाद उच्च स्तर से इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और राजस्व विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। अब निरीक्षण के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, नियमों का उल्लंघन या मुआवजा प्राप्त करने की मंशा से निर्माण के प्रमाण सामने आते हैं, तो संबंधित पक्षों पर कड़ी कार्रवाई संभव है।
फिलहाल प्रशासन जांच में जुटा है, लेकिन सवाल यही है—क्या यह सिर्फ निर्माण है, या इसके पीछे कोई बड़ा खेल छिपा है? आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट इस पूरे प्रकरण की दिशा और दशा दोनों तय करेगी।
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