कटौती, महंगे बिल और लापरवाही के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़।
शहर में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था अब जनआक्रोश का रूप ले चुकी है। अनियमित कटौती, स्मार्ट मीटर के बाद बढ़े हुए बिजली बिल और शिकायतों पर विभागीय उदासीनता को लेकर बुधवार को ‘युवा संकल्प’ के कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग के जोन-2 कार्यालय का घेराव किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर लापरवाही और तानाशाही रवैये का आरोप लगाते हुए प्रतीकात्मक रूप से ‘बेशर्म का पौधा’ भेंट कर नाराजगी जाहिर की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शहर में बिना किसी पूर्व सूचना के कभी भी बिजली आपूर्ति बाधित कर दी जाती है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जूटमिल, मोदहापारा, मिट्ठूमुड़ा, चक्रधरनगर, अतरमुड़ा और टीवी टॉवर जैसे इलाकों में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है, जहां घंटों बिजली गुल रहने से दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
मेंटेनेंस के नाम पर सवाल
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि गर्मी और सर्दी के मौसम में भी घंटों ‘मेंटेनेंस’ के नाम पर बिजली बंद रखी जाती है, लेकिन बारिश शुरू होते ही मामूली हवा या पेड़ गिरने जैसी घटनाओं में पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है। उनका कहना है कि यदि नियमित रखरखाव किया जा रहा है, तो उसका असर जमीनी स्तर पर क्यों नहीं दिखता।
शिकायत तंत्र भी सवालों के घेरे में
प्रदर्शन के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि विभागीय अधिकारी और कर्मचारी उपभोक्ताओं के फोन तक नहीं उठाते। हेल्पलाइन नंबरों पर भी समय पर सहायता नहीं मिलती, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
पुराने वादों पर अमल नहीं
संगठन ने कुछ वर्ष पूर्व पेड़ गिरने से हुई एक युवक की मौत का मामला भी उठाया। आरोप है कि उस समय बिजली लाइनों के आसपास पेड़ों की छंटाई कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे हादसों की आशंका बनी हुई है।
स्मार्ट मीटर पर भी घेरा
विरोध प्रदर्शन में स्मार्ट मीटर को लेकर भी असंतोष सामने आया। कार्यकर्ताओं का दावा है कि पहले जहां उपभोक्ताओं के बिल 200 से 500 रुपये के बीच आते थे, वहीं स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिलों में कई गुना वृद्धि देखी जा रही है।
विभाग की चुप्पी
इस पूरे मामले में बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, बढ़ते जनदबाव के बीच अब यह देखना अहम होगा कि विभाग इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और व्यवस्था सुधार के लिए क्या ठोस पहल की जाती है।
यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि यदि बुनियादी सेवाओं में सुधार नहीं हुआ, तो जनता का आक्रोश आगे और व्यापक रूप ले सकता है।
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