धरमजयगढ़ का जमीन खेल: 40 एकड़ भूमि पर कब्जे का आरोप, कलेक्टर कोर्ट में खुली परतें

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़।
जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में भूमि आवंटन से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बांग्लादेश से आए विस्थापितों को आजीविका के लिए दी गई शासकीय जमीन कथित रूप से निजी हाथों में पहुंच गई और अब इस पूरे प्रकरण ने कलेक्टर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। प्राथमिक जांच में लगभग 40 एकड़ भूमि पर कब्जे और नामांतरण में अनियमितता की बात सामने आई है।
मामले के केंद्र में महावीर बैरागी और उनके परिवार का नाम सामने आ रहा है। आरोप है कि जिन जमीनों का अंतरण नियमों के तहत प्रतिबंधित था, उन्हें क्रमशः राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराते हुए निजी स्वामित्व में परिवर्तित कर लिया गया। यह जमीन मूल रूप से विस्थापित परिवारों को कृषि उपयोग के लिए दी गई थी, जिसका न तो हस्तांतरण होना था और न ही अन्य प्रयोजनों के लिए उपयोग।
जांच में सामने आया कि महावीर बैरागी के परिवार—जिसमें उनके पिता महादेव समेत अन्य सदस्य शामिल हैं—के नाम पर अलग-अलग खसरा नंबरों में भूमि दर्ज हो चुकी है। इनमें से कई भूखंडों का डायवर्सन कर व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग के लिए भी परिवर्तित किया गया है।
सूत्र बताते हैं कि बायसी और धरमजयगढ़ कॉलोनी के कई खसरा नंबरों की जमीनें न केवल अपने नाम कराई गईं, बल्कि उन्हें बंधक रखकर बैंक से ऋण भी लिया गया। एक मामले में तो लगभग 40 लाख रुपये का लोन लेने की बात सामने आई है। इसके अलावा, कृषि भूमि पर उत्पादन दिखाकर बड़ी मात्रा में धान की बिक्री भी दर्ज की गई है।
कैसे खुला मामला?
राजस्व रिकॉर्ड की पड़ताल और शिकायतों के आधार पर की गई जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए कलेक्टर कोर्ट में विधिवत प्रकरण पंजीबद्ध कर दिया है। साथ ही, संबंधित सभी खसरा दस्तावेज, आदेश और नामांतरण की फाइलें तलब की गई हैं।
अब सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि
– किन परिस्थितियों में जमीन का नामांतरण हुआ
– किन अधिकारियों ने अनुमोदन दिया
– और क्या इसमें नियमों का उल्लंघन हुआ
तहसील स्तर पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने तहसील कार्यालय की भूमिका को भी संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। नामांतरण और डायवर्सन जैसे संवेदनशील मामलों में यदि नियमों की अनदेखी हुई है, तो जिम्मेदारी तय होना तय माना जा रहा है।
जमीन से जुड़ा बड़ा पैटर्न?
रायगढ़ जिला पहले भी जमीन घोटालों को लेकर चर्चा में रहा है। आवंटित, कोटवारी और शासकीय भूमि के हस्तांतरण के मामलों में लगातार गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे हैं। धरमजयगढ़ का यह मामला उसी श्रृंखला की एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जहां ‘कागजों का खेल’ जमीन की हकीकत बदल देता है।
अब आगे…
कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई के बाद
– नामांतरण निरस्त हो सकता है
– भूमि वापस शासकीय या मूल हितग्राहियों के नाम हो सकती है
– और दोषियों पर राजस्व एवं आपराधिक कार्रवाई भी संभव है
धरमजयगढ़ का यह मामला सिर्फ 40 एकड़ जमीन का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जिसमें कमजोर वर्गों के लिए बनी नीतियां ही उनके खिलाफ इस्तेमाल हो जाती हैं। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या यह मामला उदाहरण बनेगा या फिर फाइलों में एरर रह जाएगा।
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