पत्थलगांव में ‘कार्यभार के बाद भी कार्रवाई’: कार्यमुक्त तहसीलदार पर 33 रजिस्ट्रियों का आरोप, विवादित जमीन सौदों ने खड़े किए बड़े सवाल

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
पत्थलगांव (जशपुर)।
जिले के राजस्व महकमे में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और वैधानिकता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पत्थलगांव के तत्कालीन तहसीलदार प्रांजल मिश्रा ने विधिवत कार्यमुक्त होने के बाद भी राजस्व अभिलेखों में हस्तक्षेप करते हुए कई रजिस्ट्रियों को अंजाम दिया।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित अधिकारी को 9 अप्रैल 2026 को अपरान्ह पश्चात बगीचा तहसील के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया था। सामान्यतः इस स्थिति में अधिकारी का उस तहसील में प्रशासनिक अधिकार समाप्त हो जाता है, लेकिन आरोप है कि 9 से 13 अप्रैल के बीच करीब 33 रजिस्ट्रियां दर्ज की गईं, जिनमें कथित रूप से उसी अधिकारी की भूमिका सामने आ रही है।
विवाद के केंद्र में खसरा नंबर 333/1
पूरे प्रकरण का सबसे संवेदनशील पहलू रायगढ़ रोड स्थित खसरा नंबर 333/1 से जुड़ा हुआ है। रिकॉर्ड के अनुसार यह भूमि पूर्व में आदिवासी श्रेणी में दर्ज थी, जिस पर विशेष कानूनी संरक्षण लागू होता है। आरोप है कि इसी भूमि के स्वरूप में बदलाव कर उसे सामान्य श्रेणी में परिवर्तित किया गया और बाद में उसे विभिन्न हिस्सों—जैसे 333/1, 333/5, 333/8—में विभाजित कर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की गई।
इस भूमि को लेकर पूर्व में भी विवाद सामने आ चुका है, जिसमें राजस्व विभाग की एक कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई तक हुई थी। ऐसे में इस जमीन पर पुनः हुए लेनदेन ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

प्रशासनिक अधिकार बनाम कार्यमुक्ति का सवाल
सबसे बड़ा प्रश्न यही उठ रहा है कि जब कोई अधिकारी विधिवत कार्यमुक्त हो चुका हो, तो क्या उसके द्वारा बाद की अवधि में किए गए राजस्व कार्य वैध माने जा सकते हैं? यदि नहीं, तो फिर इन रजिस्ट्रियों की वैधानिक स्थिति क्या होगी?
राजस्व नियमों के जानकारों का मानना है कि कार्यमुक्ति के बाद संबंधित अधिकारी को किसी भी प्रकार के प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार नहीं रहता। ऐसे में यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि गंभीर प्रशासनिक अनियमितता भी मानी जा सकती है।
शिकायत पहुंची उच्च स्तर तक
इस पूरे प्रकरण को लेकर संबंधित दस्तावेजों के साथ राज्य स्तर तक शिकायत भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में 9 से 13 अप्रैल के बीच हुई सभी रजिस्ट्रियों को निरस्त करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
सूत्रों के अनुसार, शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि राजस्व तंत्र में पारदर्शिता बनी रह सके।
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल यह मामला आरोपों और दस्तावेजों के आधार पर चर्चा में है। आधिकारिक जांच और प्रशासनिक पुष्टि के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो यह प्रकरण राजस्व विभाग में एक बड़े प्रशासनिक उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।
स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है और आमजन की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है—क्या विवादित रजिस्ट्रियां निरस्त होंगी और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
जांच पूरी होने तक यह मामला न केवल पत्थलगांव बल्कि पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक जवाबदेही की एक अहम परीक्षा बन चुका है।
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