ड्रोन सर्वे से तेज़ हुई दुर्गापुर खदान परियोजना: विकास की रफ्तार या विस्थापन की चिंता?

Journalist Amardeep chauhan
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धरमजयगढ़/रायगढ़। बहुप्रतीक्षित दुर्गापुर ओपन कास्ट कोयला खदान परियोजना अब निर्णायक चरण में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, 29 जून 2026 से अधिग्रहित भूमि पर ड्रोन सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा। यह कदम न केवल परियोजना की गति को दर्शाता है, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीणों के बीच नई आशंकाओं और सवालों को भी जन्म दे रहा है।
SECL प्रबंधन ने दुर्गापुर ग्राम पंचायत को पूर्व सूचना देते हुए सर्वे कार्य में स्थानीय सहयोग सुनिश्चित करने की अपील की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ड्रोन सर्वे का उद्देश्य अधिग्रहित भूमि की वास्तविक स्थिति का आकलन, सीमांकन, वन क्षेत्र की पहचान और प्रस्तावित परियोजना के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना की योजना तैयार करना है। साथ ही, भविष्य में विस्तार और तकनीकी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक आंकड़े भी इस प्रक्रिया के माध्यम से जुटाए जाएंगे।
हालांकि, सर्वे से पहले क्षेत्र में तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर मुआवजे की स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर संशय है कि हाल ही में बनाए गए मकान, फार्म हाउस या अन्य संरचनाएं मुआवजे के दायरे में आएंगी या नहीं। प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया है, जिससे भ्रम और चिंता दोनों बढ़ रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूर्व में भारतमाला परियोजना की तरह मुआवजे को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, तो यह क्षेत्र में असंतोष को और बढ़ा सकता है। ग्रामीणों की मांग है कि ड्रोन सर्वे से पहले तक हुए सभी निर्माण कार्यों को वैध मानते हुए उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार के अन्याय की स्थिति न बने।
प्रशासनिक स्तर पर परियोजना को लेकर तेजी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। SECL ने बताया है कि यह सर्वे रायगढ़ कलेक्टर से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), धरमजयगढ़ की अनुमति के आधार पर किया जा रहा है। साथ ही, ड्रोन संचालन में DGCA Drone Rules-2021 के सभी प्रावधानों का पालन किया जाएगा।
परियोजना के इस चरण में पहुंचने के बाद अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या दुर्गापुर क्षेत्र विकास की ओर बढ़ेगा या फिर यह प्रक्रिया विरोध और असंतोष को जन्म देगी। एक ओर कंपनी इसे ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक प्रगति के लिए आवश्यक कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवार पुनर्वास, रोजगार और मुआवजे जैसे मुद्दों पर स्पष्टता चाहते हैं।
आने वाले दिनों में ड्रोन सर्वे के दौरान ग्रामीणों की प्रतिक्रिया, प्रशासन की पारदर्शिता और SECL की संवेदनशीलता ही तय करेगी कि यह परियोजना क्षेत्र के लिए अवसर बनेगी या विवाद का कारण। फिलहाल, दुर्गापुर खदान परियोजना एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां से आगे की हर दिशा क्षेत्र के भविष्य को प्रभावित करेगी।
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