“जमीन के लालच का अंजाम: न जमीन मिली, न आजादी—तीन दोषियों को हुई उम्रकैद”

Journalist Amardeep chauhan
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तमनार हत्याकांड: एक जमीन, एक मौत और तीन जिंदगी बर्बाद… तीनों दोषियों को हुआ आजीवन कारावास
रायगढ़। जमीन के एक छोटे से टुकड़े को लेकर उपजा विवाद आखिरकार तीन जिंदगियों को बर्बाद कर गया। करीब छह वर्ष पुराने चर्चित तमनार हत्याकांड में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल एक परिवार को न्याय दिलाता है, बल्कि समाज के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि जमीन के लालच में उठाया गया हिंसक कदम अंततः विनाश की ओर ही ले जाता है।
अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत ने आरोपी शिव चरण पटेल, खुशी राम पटेल और मुकेश पटेल को हत्या के अपराध में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास तथा हत्या के प्रयास के मामले में 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उपहति कारित करने के अपराध में एक वर्ष के कारावास और विभिन्न धाराओं के तहत अर्थदंड भी लगाया गया है।

घटना का घटनाक्रम
अभियोजन के अनुसार, 2 दिसंबर 2020 की सुबह ग्राम दनौट निवासी मुरलीधर चौधरी और लक्ष्मीधर चौधरी अपनी मां को मायके से प्राप्त जमीन का सीमांकन कराने पटवारी के साथ ग्राम रायपारा पहुंचे थे। मौके पर ग्राम कोटवार, गोविन्द पटेल सहित अन्य ग्रामीण भी मौजूद थे और खेत की नाप-जोख की प्रक्रिया चल रही थी।
इसी दौरान आरोपी पक्ष लाठी-डंडों से लैस होकर वहां पहुंचा और जमीन नपवाने का विरोध करने लगा। देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप ले लिया। आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी और अचानक हमला बोल दिया। इस हमले में गोविन्द पटेल, मुरलीधर चौधरी और लक्ष्मीधर चौधरी गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही बेहोश हो गए।
घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तमनार ले जाया गया, जहां से उनकी हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रायगढ़ रेफर किया गया। लेकिन रास्ते में ही गोविन्द पटेल ने दम तोड़ दिया, जबकि दोनों घायल भाइयों का इलाज जारी रहा।

जांच और न्यायिक प्रक्रिया
घटना की रिपोर्ट करन पटेल द्वारा थाना तमनार में दर्ज कराई गई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज कर विस्तृत विवेचना की और साक्ष्य जुटाकर आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गवाहों के बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से हमला कर हत्या और हत्या के प्रयास की घटना को अंजाम दिया।
पीड़ित परिवार को राहत
न्यायालय ने मृतक गोविन्द पटेल के आश्रितों को एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ को अनुशंसा भी की है। मामले में राज्य की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी की।
समाज के लिए संदेश
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि जमीन के लालच में लिया गया एक गलत निर्णय न केवल एक निर्दोष की जान लेता है, बल्कि आरोपियों का पूरा जीवन भी जेल की सलाखों के पीछे धकेल देता है। विडंबना यह है कि जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ, वह न तो आरोपियों को मिली और न ही उनका जीवन सामान्य रह सका।
आज का यह फैसला साफ संकेत देता है कि कानून के सामने हिंसा का कोई स्थान नहीं है और न्याय देर से ही सही, लेकिन होता जरूर है।
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