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टीडीएस प्रमाणपत्र के लिए भटकता रहा उपभोक्ता, बैंक की लापरवाही पर आयोग सख्त — एक लाख का हर्जाना

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com

रायपुर। टीडीएस प्रमाण पत्र न मिलने के कारण रायपुर के एक उपभोक्ता को महीनों तक बैंक की शाखाओं के चक्कर काटने पड़े। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, अतिरिक्त पीठ, रायपुर ने इसे सेवा में गंभीर कमी मानते हुए इंडियन बैंक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने बैंक को 45 दिन के भीतर भुगतान का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?
परिवादी राहुल गुप्ता ने इंडियन बैंक के माध्यम से भारतीय रिजर्व बैंक का  एक बॉन्ड खरीदा था, जिसका आवंटन नई दिल्ली शाखा से हुआ। बांड पर ब्याज से 01.07.2022 को टीडीएस काटा गया, लेकिन फॉर्म 26AS में यह कटौती नहीं दिखी।

राहुल ने बैंक को कई बार सूचित किया। रायपुर शाखा से नई दिल्ली और फिर चेन्नई शाखा भेजा गया। नई दिल्ली शाखा के प्रबंधक ने कहा कि उनकी नई नियुक्ति हुई है और जानकारी नहीं है। चेन्नई शाखा ने भी कोई समाधान नहीं दिया। 01.01.2023 की कटौती का प्रमाण पत्र तो मिला, लेकिन 01.07.2022 का नहीं।

दिल्ली में बाढ़ में फंसे, फिर भी नहीं मिला समाधान
परिवादी 06.07.2023 और 07.07.2023 को दिल्ली शाखा गया। 08.07.2023 को दिल्ली में 40 साल में एक दिन की सबसे अधिक 126 मिमी बारिश हुई और वह बाढ़ में फंस गया। बार-बार अनुरोध के बावजूद बैंक ने गलत प्रमाण पत्र और टीडीएस जारी कर मामले को दबाने का प्रयास किया।

नतीजा यह हुआ कि आयकर विभाग ने ब्याज और जुर्माना लगा दिया। मानसिक और आर्थिक परेशानी के लिए परिवादी ने 5 लाख रुपये हर्जाना और 50 हजार रुपये वाद व्यय की मांग की थी।

आयोग ने क्या कहा?
आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुन्डू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस ने माना कि बैंक की लापरवाही से परिवादी को अनावश्यक रूप से टैक्स का भुगतान करना पड़ा। बैंक ने न तो प्रमाण पत्र दिया और न ही सुनवाई में उपस्थित हुआ।

आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत सेवा में कमी माना।

आदेश
1. मानसिक और आर्थिक क्षति: 1,00,000 रुपये 45 दिन में भुगतान करें।
2. वाद व्यय: 7,000 रुपये 45 दिन में दें।
3. देरी पर 7% सालाना ब्याज देना होगा।

क्यों अहम है यह फैसला?
यह आदेश बैंकों के लिए नजीर है। टीडीएस प्रमाण पत्र समय पर न देना और उपभोक्ता को शाखाओं के बीच भटकाना ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ है। आयोग ने स्पष्ट किया कि डिजिटल युग में भी बैंकों की जवाबदेही खत्म नहीं होती। प्रकरण क्रमांक DC/387/CC/72/2025 में यह आदेश 17.06.2026 को पारित हुआ।

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Amar Chouhan

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