अचानक बदले मौसम ने मचाई अफरा-तफरी, अंधड़-ओलों ने थाम दी रफ्तार; अगले तीन दिन प्रदेश में भारी चेतावनी

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायपुर।
शनिवार की रात राजधानी रायपुर के लिए सामान्य नहीं रही। दिनभर की उमस के बाद जैसे ही अंधेरा गहराया, आसमान का मिजाज अचानक बिगड़ गया। तेज हवाओं, धूलभरी आंधी और ओलों ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। हालात इतने बिगड़े कि कई जगहों पर विशाल होर्डिंग्स हवा में उखड़कर गिर पड़े, जबकि केनाल रोड पर एक बड़ा पेड़ जड़ समेत उखड़कर सड़क पर आ गिरा। इसके चलते यातायात पूरी तरह ठप हो गया और देर रात तक लोग जाम में फंसे रहे।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन की सुस्ती भी सामने आई। नगर निगम और लोक निर्माण विभाग की टीमें समय पर मौके पर नहीं पहुंच सकीं, जिसके चलते पुलिस को तत्काल बैरिकेडिंग कर यातायात को एकतरफा करना पड़ा। राहत और बचाव कार्य देर रात शुरू हो पाए, तब जाकर मार्ग आंशिक रूप से बहाल हो सका।
राजधानी तक सीमित नहीं रहा असर
मौसम का यह तेवर केवल रायपुर तक सीमित नहीं रहा। मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भी मौसम ने अचानक करवट ली। रायगढ़, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और सारंगढ़ में दिनभर की चिपचिपी गर्मी के बाद शाम होते ही तेज हवाएं चलीं और कई जगह हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। वहीं दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल—जगदलपुर सहित—में रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी है। दुर्ग और भिलाई में भी बादलों की आवाजाही के बीच मौसम अस्थिर बना हुआ है।
मौसम विभाग का अलर्ट: संभलकर रहें
मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए पूरे प्रदेश में सतर्कता बरतने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।
तापमान में भी उतार-चढ़ाव जारी रहेगा—अगले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी संभव है, जबकि इसके बाद भी पारा धीरे-धीरे ऊपर चढ़ता रहेगा। फिलहाल रायपुर 40.4 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया, जबकि पेंड्रा रोड 18.6 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा रहा।
मौसम के पीछे कई सिस्टम एक साथ सक्रिय
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने का नतीजा है।
दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र ने वातावरण में नमी बढ़ाई है। इसके साथ ही ऊपरी हवा में सक्रिय चक्रवाती घेरा और मध्य प्रदेश के ऊपर बना सिस्टम प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर रहा है।
दो प्रमुख ट्रफ लाइनें—एक मध्य प्रदेश से बंगाल तक और दूसरी मध्य प्रदेश से कर्नाटक तक—वायुमंडलीय अस्थिरता को और बढ़ा रही हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, विदर्भ और दक्षिण भारत के हिस्सों में सक्रिय सिस्टम भी छत्तीसगढ़ में नमी खींच रहे हैं, जिससे आंधी और बारिश की स्थितियां बन रही हैं।
मानसून की आहट, लेकिन अभी राहत नहीं
प्री-मानसून गतिविधियों के बीच एक राहत भरी खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून तय समय के आसपास आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 26 मई के आसपास मानसून केरल तट पर दस्तक दे सकता है। हालांकि इसमें कुछ दिन आगे-पीछे होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के केरल पहुंचने के बाद ही इसके छत्तीसगढ़ तक पहुंचने की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल प्रदेशवासियों के लिए संदेश साफ है—अगले कुछ दिन मौसम के तेवर सख्त रहेंगे। तेज हवाओं, बिजली गिरने और अचानक बारिश से बचाव के लिए सतर्क रहना ही बेहतर विकल्प है।