सराईपाली स्वास्थ्य केंद्र में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह पर लोगों को दी गई आंखों की सुरक्षा की सीख

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
तमनार। आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने और ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सराईपाली में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के तहत विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तमनार के बीएमओ डॉ. डी. एस. पैकरा के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा 8 मार्च से 14 मार्च 2026 तक विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लिबरा, उरबा और सराईपाली में भी जनजागरूकता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को आंखों की देखभाल और ग्लूकोमा बीमारी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान संस्था प्रभारी देवेंद्र देवागन ने उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि आंखें मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण इंद्रियों में से एक हैं। यदि आंखें स्वस्थ हैं तो व्यक्ति इस सुंदर संसार को देख सकता है, लेकिन यदि आंखों की रोशनी चली जाए तो पूरा जीवन अंधकारमय हो जाता है। उन्होंने कहा कि “आंखें हैं तो संसार है, नहीं तो जग अंधियार है”, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर आंखों की जांच अवश्य करानी चाहिए। इससे किसी भी बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता चल सकता है और उसका उपचार आसान हो जाता है।
इस अवसर पर नेत्र सहायक लक्ष्मी प्रसाद सारथी ने ग्लूकोमा के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह बीमारी प्रायः 40 वर्ष की आयु के बाद अधिक देखने को मिलती है। उन्होंने बताया कि हमारी आंखों में एक विशेष प्रकार का तरल पदार्थ होता है जो आंखों के गोले को चिकना और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। जब इस तरल पदार्थ का संतुलन बिगड़ जाता है या उसका प्रवाह प्रभावित होता है तो आंखों के अंदर दबाव बढ़ने लगता है, जिससे आंखों की नसों पर असर पड़ता है और धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर होने लगती है।
उन्होंने कहा कि ग्लूकोमा की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखाई देते, जिसके कारण लोग इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय रहते इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी स्थायी रूप से आंखों की रोशनी छीन सकती है। इसलिए 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को नियमित रूप से आंखों की जांच करवानी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान अर्जुन बेहरा और शिवलाल साहू का भी विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों को आंखों की स्वच्छता बनाए रखने, संतुलित आहार लेने और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने के महत्व के बारे में भी विस्तार से बताया।
इस अवसर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सराईपाली के समस्त स्टाफ, तरुण कुमार थवाइत, बी. भगत सहित फील्ड में कार्यरत सभी आरएचओ और सीएचओ उपस्थित रहे। साथ ही अस्पताल पहुंचे ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने भी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को आंखों की सुरक्षा और ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
News associate Naresh rathiya (chhotu) PdGnV