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वन भूमि पर निर्माण का विवाद हाईकोर्ट पहुंचा: धनबादा जल विद्युत परियोजना की वैधता पर उठे गंभीर सवाल

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com

धरमजयगढ़/रायगढ़, 22 जून 2026।
धरमजयगढ़ विकासखंड के भालूपखना क्षेत्र में संचालित धनबादा पावर की 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना अब कानूनी जांच के दायरे में आ गई है। वन भूमि के उपयोग और वैधानिक अनुमति से जुड़े आरोपों को लेकर मामला  तक पहुंच गया है, जिससे परियोजना की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस संबंध में याचिकाकर्ता  ने अधिवक्ता  के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि परियोजना से जुड़े निर्माण एवं विस्तार कार्य बिना आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों के किए गए।

वन संरक्षण कानून के उल्लंघन का आरोप
याचिका में विशेष रूप से  की धारा 2 का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी वन भूमि का गैर-वानिकी उपयोग केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद संबंधित क्षेत्र में निर्माण कार्य किए जाने के संकेत मिले हैं।

प्रस्तुत दस्तावेजों में तत्कालीन वन मंडलाधिकारी, धरमजयगढ़ के पत्राचार का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कथित रूप से स्पष्ट किया गया था कि वन एवं राजस्व वन भूमि पर गैर-वानिकी कार्यों की अनुमति प्राप्त नहीं की गई थी।

खसरा नंबर 347 और 365 पर उठे सवाल
याचिका के अनुसार राजस्व वन क्षेत्र के खसरा नंबर 347 और 365 में निर्माण कार्य किए जाने के आरोप हैं। यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल वन कानूनों का उल्लंघन होगा, बल्कि परियोजना की वैधता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।

विद्युत लाइन विस्तार भी विवाद में
मामले में 33 केवी विद्युत लाइन के विस्तार को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि परियोजना को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से वन क्षेत्र में विद्युत पोल और केबल बिछाने का कार्य किया गया, जबकि इसकी स्वीकृति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि 11 केवी लाइन के ढांचे का उपयोग कर 33 केवी विस्तार किया गया।

हाईकोर्ट में शासन ने मांगा समय
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया है। अब अगली सुनवाई में शासन के पक्ष और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

वन्यजीव सुरक्षा पर भी चिंता
यह पूरा क्षेत्र हाथी प्रभावित वन क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। अतीत में यहां करंट की चपेट में आने से हाथियों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में परियोजना से जुड़े विद्युत विस्तार कार्यों को लेकर वन्यजीव सुरक्षा पर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

परियोजना पर संकट के संकेत
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच या न्यायालय की सुनवाई में वन संरक्षण कानून, पर्यावरणीय स्वीकृतियों या वन्यजीव सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो परियोजना पर रोक लगाने या अन्य कड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों की नजर बनी हुई है।

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Amar Chouhan

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