रायगढ़-घरघोड़ा और तमनार-पूंजीपथरा फोरलेन के लिए भूअर्जन से पहले खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
फोरलेन परियोजनाओं पर कलेक्टर का कड़ा शिकंजा: प्रभावित गांवों में जमीन के सौदे फिलहाल बंद, भू-अर्जन प्रक्रिया तेज करने के निर्देश
रायगढ़। औद्योगिक गतिविधियों के दबाव से जूझ रही सड़कों को राहत देने की दिशा में प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाया है। रायगढ़-घरघोड़ा और पूंजीपथरा-तमनार फोरलेन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में जमीन की खरीदी-बिक्री सहित सभी प्रकार के राजस्व लेन-देन पर अस्थायी रोक लगा दी है। कलेक्टर के इस आदेश को परियोजना में पारदर्शिता बनाए रखने और संभावित अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, रायगढ़ जिले के घरघोड़ा और तमनार क्षेत्र लंबे समय से भारी औद्योगिक यातायात का दबाव झेल रहे हैं। संकरी और जर्जर सड़कों पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से आए दिन जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बनती रही है। इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने रायगढ़-पूंजीपथरा-घरघोड़ा मार्ग (लगभग 37 किलोमीटर) के चौड़ीकरण को मंजूरी देते हुए करीब 213 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इस सड़क को फोरलेन के रूप में विकसित किए जाने से यातायात व्यवस्था में सुधार और औद्योगिक परिवहन को सुगम बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
परियोजना के दायरे में आने वाले जगतपुर, उर्दना, चिरईपानी, पाली, शिवपुरी, तराईमाल, पूंजीपथरा, सामारूमा, अमलीडीह, भालूमार और भेण्ड्रा जैसे गांवों में कलेक्टर ने निजी भूमि के क्रय-विक्रय, बंटवारा, डायवर्सन, नवीन निर्माण और अन्य अनुमति संबंधी प्रक्रियाओं पर रोक लगा दी है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कदम भू-अर्जन से पहले जमीन की कीमतों में कृत्रिम उछाल और फर्जी लेन-देन की आशंका को रोकने के लिए उठाया गया है।
इसी तरह पूंजीपथरा से तमनार तक प्रस्तावित फोरलेन परियोजना, जिसकी लागत लगभग 46.43 करोड़ रुपए आंकी गई है, उसके लिए भी प्रभावित गांवों—पूंजीपथरा, पड़कीपहाड़ी, आमाघाट और गोढ़ी—में समान प्रतिबंध लागू किया गया है। संबंधित तहसीलदारों और उप पंजीयकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंध अवधि में किसी भी प्रकार का रजिस्ट्रेशन या राजस्व प्रक्रिया अनुमन्य नहीं होगी।
प्रशासन ने केवल प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने तक ही कदम सीमित नहीं रखा है, बल्कि भू-अर्जन प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने पर भी जोर दिया है। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि सर्वेक्षण के दिन ही ‘पत्रक-10’ तैयार किया जाए, ताकि बाद में विवाद की गुंजाइश कम रहे। साथ ही, पूरे सर्वे और मौके के निरीक्षण की वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। बिना पत्रक तैयार किए किसी भी प्रकार की मार्किंग नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया, तो न केवल औद्योगिक यातायात को राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय आबादी के लिए भी आवागमन सुरक्षित और सुगम हो सकेगा। फिलहाल प्रशासन का फोकस भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को बिना विवाद के पूरा करने पर है, जिसके लिए सख्ती और निगरानी दोनों बढ़ा दी गई हैं।
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