वेदांता प्लांट हादसा: मजिस्ट्रियल रिपोर्ट में ‘सतही जांच’, 25 मौतों पर अब भी जवाबदेही तय नहीं

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
सक्ती, 21 जुलाई 2026।
सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण औद्योगिक हादसे के तीन महीने बाद भी जिम्मेदारों की जवाबदेही तय नहीं हो सकी है। एसडीएम डभरा द्वारा प्रस्तुत मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के समक्ष दाखिल तो कर दी गई है, लेकिन इसमें घटना के मूल कारणों और जिम्मेदार अधिकारियों पर स्पष्ट निष्कर्ष देने से परहेज किया गया है। रिपोर्ट को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
इस हादसे में 25 श्रमिकों की दर्दनाक मौत हुई थी, जबकि 10 से अधिक गंभीर रूप से झुलस गए थे। घटना के बाद पुलिस ने लापरवाही और सामूहिक अपराध की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, जिसमें कंपनी प्रबंधन के शीर्ष स्तर तक के अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। बावजूद इसके, जांच की दिशा अब तक निर्णायक मोड़ नहीं ले सकी है।
केंद्रीय रिपोर्ट के इंतजार में ‘अटकी’ जिम्मेदारी
एसडीएम विनय कुमार कश्यप की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अंतिम निष्कर्ष केंद्रीय स्तर पर गठित तकनीकी जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जा सकेगा। यही कारण है कि स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल किसी भी अधिकारी या कंपनी प्रबंधन की सीधी जिम्मेदारी तय नहीं की है।
रिपोर्ट में मृतकों और घायलों की सूची एनजीटी को सौंपे जाने की बात कही गई है, लेकिन मुआवजे की वास्तविक स्थिति अब भी अस्पष्ट है। कंपनी की ओर से 35-35 लाख, केंद्र सरकार से 5-5 लाख और राज्य सरकार से 2-2 लाख रुपये की घोषणा तो हुई, लेकिन भुगतान की प्रगति पर प्रशासन मौन है।
हादसे की वजह: तकनीकी गड़बड़ी या सिस्टम फेलियर?
मजिस्ट्रियल जांच में हादसे की जो वजह सामने आई है, उसके अनुसार प्राइमरी एयर फैन में आई खराबी के चलते बॉयलर के फर्नेस में प्रेशर असंतुलन पैदा हुआ। इसके साथ ही बिना जला हुआ कोयला अंदर जमा होता गया, जो अचानक सुलग उठा और विस्फोट की स्थिति बन गई।
इस विस्फोट का असर बॉयलर के मेन डाउनकमर से जुड़े 14 पाइपों पर पड़ा, जो एक साथ फट गए। तेज दबाव से निकली भाप ने वहां काम कर रहे श्रमिकों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे मौके पर ही बड़ी संख्या में मजदूरों की मौत हो गई।
चार कंपनियों के श्रमिक बने शिकार
हादसे में एक ही नहीं, बल्कि चार अलग-अलग कंपनियों के श्रमिक प्रभावित हुए। जांच के अनुसार—
– एनजीएसएल: 4 मृत, 7 घायल
– पावरमेक प्रोजेक्ट लिमिटेड: 7 मृत
– ग्रोवर एंड वेल इंडिया लिमिटेड: 14 मृत, 1 घायल
– डीसीपीएल: 2 घायल
गौरतलब है कि एनजीएसएल ही संयंत्र का संचालन कर रही थी, जिससे उसकी भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासन पर ‘कंपनी बचाने’ के आरोप
पूरे घटनाक्रम में प्रशासन की भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष उभर रहा है। मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट में जहां तकनीकी पहलुओं का जिक्र तो किया गया है, वहीं जवाबदेही तय करने से बचने को लेकर यह आरोप लग रहे हैं कि जांच को जानबूझकर सीमित दायरे में रखा गया।
अब सबकी निगाहें केंद्रीय बॉयलर बोर्ड और तकनीकी जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह महज तकनीकी हादसा था या गंभीर लापरवाही का परिणाम।
निष्कर्ष से ज्यादा सवाल छोड़ गई रिपोर्ट
तीन महीने बाद आई यह रिपोर्ट कई अहम सवालों को अनुत्तरित छोड़ देती है—क्या सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था? क्या प्लांट में नियमित निरीक्षण होते थे? और सबसे बड़ा सवाल—25 मजदूरों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है?
जब तक इन सवालों के जवाब सामने नहीं आते, यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रतीक बना रहेगा।
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