पेसा-FRA पर साय सरकार का बड़ा दांव: ग्राम स्वराज, अधिकार और संसाधनों पर ‘लोक हक’ के लिए टास्क फोर्स एक्टिव

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायपुर, 05 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित क्षेत्रों के शासन और आदिवासी अधिकारों की दिशा तय करने वाली अहम कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम (FRA) पर गठित राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की पहली बैठक महानदी भवन में हुई, जिसमें ‘कागज़ से ज़मीन’ तक क्रियान्वयन की ठोस रूपरेखा पर सहमति बनी। सरकार का फोकस साफ है—ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार, स्थानीय संसाधनों पर समुदाय का हक और विभागों के बीच बेहतर समन्वय।
बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पेसा और FRA का प्रभावी क्रियान्वयन सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। प्रदेश की लगभग एक-तिहाई आबादी आदिवासी समाज से जुड़ी है, ऐसे में उनकी परंपराओं, आजीविका और सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा के साथ विकास का संतुलन साधना जरूरी है। इसी उद्देश्य से एक राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति बनाने के निर्देश दिए गए, जो विभिन्न विभागों के नियमों और प्रक्रियाओं में तालमेल बैठाकर एकीकृत रोडमैप तैयार करेगी।
जिला स्तर पर निगरानी, ज़मीनी गति पर जोर
सरकार ने संकेत दिए हैं कि सिर्फ नीति-निर्माण नहीं, बल्कि फील्ड में परिणाम दिखना प्राथमिक लक्ष्य होगा। इसके लिए जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को तुरंत सक्रिय करने का निर्देश दिया गया है, ताकि ग्राम सभाओं के अधिकार, वन उपज, लघु खनिज और स्थानीय संसाधनों से जुड़े फैसले समयबद्ध तरीके से लागू हो सकें। अधिकारियों से कहा गया है कि लंबित दावों और प्रक्रियाओं की नियमित समीक्षा कर बाधाएं दूर करें।
ग्राम स्वशासन और ‘लोक भागीदारी’ पर फोकस
बैठक का केंद्रीय बिंदु ग्राम स्वशासन को मजबूत करना रहा। पेसा के प्रावधानों के अनुरूप ग्राम सभाओं को निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति देने, पारंपरिक व्यवस्थाओं को मान्यता देने और संसाधनों के उपयोग में स्थानीय समुदाय की सहमति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। सरकार व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर कानूनों को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने की भी तैयारी में है, ताकि अधिकारों का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचे।
वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम सहित वरिष्ठ अधिकारी और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी विभागों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि पेसा और FRA से जुड़े निर्णयों में ‘सिंगल-विंडो अप्रोच’ अपनाकर प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
नीतिगत संकेत: विकास और अधिकार साथ-साथ
सरकार के इस कदम को नीति-स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर औद्योगिक और खनिज गतिविधियों वाले क्षेत्रों में निवेश और परियोजनाएं हैं, तो दूसरी ओर स्थानीय समुदायों के अधिकार और पर्यावरणीय संतुलन। टास्क फोर्स के जरिए सरकार इन दोनों के बीच संतुलन साधने का प्रयास कर रही है, ताकि विकास की रफ्तार बनी रहे और ‘जल, जंगल, जमीन’ पर समुदाय का हक भी सुरक्षित रहे।
आने वाले दिनों में कार्ययोजना समिति की रिपोर्ट, जिला समितियों की सक्रियता और जनजागरूकता अभियान की प्रगति से इस पहल की वास्तविक दिशा तय होगी। अगर तय समयसीमा में क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ, तो पेसा और FRA के तहत छत्तीसगढ़ एक ‘मॉडल स्टेट’ के रूप में उभर सकता है—जहां ग्राम स्वराज सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत हो।
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