डिजिटल निगरानी का सख्त पहरा: अब ‘एप’ से तय होगी शिक्षकों की हाजिरी, गैरहाजिरी पर कार्रवाई के संकेत

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 18 जुलाई 2026।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की अनियमित उपस्थिति पर लगाम कसने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने डिजिटल सिस्टम को पूरी तरह लागू कर दिया है। अब शिक्षकों को ‘विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) एप’ के जरिए ही अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि निर्धारित दायरे में रहकर हाजिरी नहीं लगाने या अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई की जाएगी।
100 मीटर के दायरे में ही लगेगी हाजिरी
नई व्यवस्था के तहत शिक्षक तभी उपस्थिति दर्ज कर पाएंगे, जब वे स्कूल परिसर से करीब 100 मीटर के भीतर होंगे। इस तकनीकी प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक वास्तविक रूप से स्कूल पहुंचें, न कि केवल कागजों में उपस्थिति दर्ज करें।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से वर्षों से चली आ रही ‘नाम मात्र की उपस्थिति’ की समस्या पर नियंत्रण लगेगा और शिक्षण व्यवस्था में सुधार होगा।
शुरुआती आंकड़े: कई ब्लॉकों में संतोषजनक नहीं उपस्थिति
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार जिले में उपस्थिति शत-प्रतिशत नहीं पहुंच पाई है। खरसिया, तमनार और पुसौर ब्लॉकों में शिक्षकों की उपस्थिति 90 से 93 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है, जबकि धरमजयगढ़, घरघोड़ा, रायगढ़ और लैलूंगा में यह आंकड़ा 86 से 88 प्रतिशत के आसपास रहा। लैलूंगा ब्लॉक में सबसे कम उपस्थिति सामने आई है, जो विभाग के लिए चिंता का विषय बन गई है।
‘जुगाड़’ तलाशने में जुटे कुछ शिक्षक
सूत्रों के मुताबिक, सख्ती बढ़ने के साथ ही कुछ शिक्षक इस डिजिटल निगरानी से बचने के तरीके भी तलाश रहे हैं। हालांकि विभाग ने साफ कर दिया है कि एप आधारित निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही या छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिक्षा गुणवत्ता सुधारने की कवायद
यह व्यवस्था केवल उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विभाग का तर्क है कि शिक्षक नियमित रूप से स्कूल पहुंचेंगे तो छात्रों की उपस्थिति और पढ़ाई दोनों में सुधार होगा।
पाठ्यपुस्तक वितरण की डिजिटल व्यवस्था भी लड़खड़ाई
इधर, पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा लागू टीबीसी एप (Textbook Corporation App) भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाया है। इस एप के जरिए किताबों के क्यूआर कोड स्कैन कर वितरण की ऑनलाइन एंट्री की जानी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसे लेकर असंतोष और तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं।
शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया
शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षक पहले से ही जनगणना, निर्वाचन और विभिन्न शासकीय कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। ऐसे में तकनीकी व्यवस्थाओं को लागू करते समय जमीनी चुनौतियों और संसाधनों की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
आगे की राह
फिलहाल शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में उपस्थिति की समीक्षा और सख्ती बढ़ाई जाएगी। यह देखना अहम होगा कि डिजिटल निगरानी का यह प्रयोग वास्तव में शिक्षा व्यवस्था में सुधार ला पाता है या नहीं।
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