खनिज क्षेत्रों के नाम पर ‘खर्च’ का खेल: CAG रिपोर्ट में 13 हजार करोड़ की योजना पर सवाल, 44% गांव अब भी वंचित

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायपुर, 18 जुलाई 2026।
छत्तीसगढ़ में खनिज प्रभावित इलाकों के विकास के लिए बनाई गई प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताज़ा ऑडिट रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 से 2024 के बीच करीब 13,101 करोड़ रुपये के उपयोग में व्यापक अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें नियमों की अनदेखी, फंड का कथित दुरुपयोग और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियां शामिल हैं।
कागजों में विकास, जमीनी हकीकत अलग
ऑडिट रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद खनिज प्रभावित 44 प्रतिशत गांवों तक योजना का अपेक्षित लाभ नहीं पहुंच पाया। इसका मतलब यह हुआ कि जिन क्षेत्रों के लिए यह योजना बनाई गई, वहीं के बड़ी आबादी अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।
टेंडर और खर्च प्रक्रिया पर उठे सवाल
CAG ने अपनी रिपोर्ट में संकेत दिया है कि कई परियोजनाओं में टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। कुछ मामलों में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया, जबकि कहीं-कहीं बिना उचित प्रक्रिया के ही कार्य आवंटित कर दिए गए। इसके अलावा, कई परियोजनाओं में फंड के उपयोग का उद्देश्य और वास्तविक खर्च में भी अंतर पाया गया है।
प्राथमिकता से भटका फोकस
प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना का मूल उद्देश्य खनन से प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क और आजीविका जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना था। लेकिन रिपोर्ट में संकेत है कि कई जगहों पर फंड का उपयोग प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के बजाय अन्य कार्यों में किया गया, जिससे योजना का मूल लक्ष्य प्रभावित हुआ।
जवाबदेही पर सवाल, सुधार की जरूरत
रिपोर्ट सामने आने के बाद अब संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने की मांग उठने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिलना, निगरानी तंत्र और कार्यान्वयन प्रक्रिया दोनों पर सवाल खड़ा करता है।
आगे क्या?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस रिपोर्ट पर क्या रुख अपनाती है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा—यह आने वाला समय तय करेगा।
फिलहाल, CAG की यह रिपोर्ट न सिर्फ योजना के क्रियान्वयन की हकीकत सामने लाती है, बल्कि यह भी बताती है कि संसाधनों की कमी से जूझ रहे खनिज क्षेत्रों में विकास की राह अभी भी लंबी है।
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