गोलीकांड का फैसला: भाई-बहन को उम्रकैद, पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह

Journalist Amardeep Chauhan
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घरघोड़ा। बहुचर्चित गढ़ गोलीकांड मामले में घरघोड़ा न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त गोपाल यादव और उसकी बहन लक्ष्मी यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत ने दोनों को मृतका दुरपती यादव की गोली मारकर हत्या का दोषी ठहराते हुए कारावास के साथ अर्थदंड से भी दंडित किया है।
मामले की जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने बताया कि घटना थाना लैलूंगा क्षेत्र के ग्राम दियागढ़ की है। घटना की रात करीब 2:20 बजे हरिराम यादव ने पुलिस को फोन कर गांव में गोली चलने की सूचना दी। सूचना मिलते ही तत्कालीन थाना प्रभारी आर.एस. तिवारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।
जांच के दौरान हरिराम यादव ने बताया कि घटना की रात वह अपने परिवार के साथ घर के भीतर सो रहा था, जबकि उसकी मां दुरपती यादव घर के बाहर खाट पर सो रही थीं। रात करीब 2 बजे कुत्ते के भौंकने की आवाज से उसकी नींद खुली। वह और उसका भाई दशरथ दरवाजा खोलकर बाहर निकल ही रहे थे कि अचानक गोली चलने की आवाज आई। बाहर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि गोपाल यादव और एक विधि से संघर्षरत बालक उनकी मां को गोली मारकर मोटरसाइकिल से फरार हो रहे थे।
घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुट गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, जिसमें सामने आया कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से रंजिश चली आ रही थी। दरअसल, हरिराम यादव ने गोपाल यादव की चचेरी बहन से प्रेम विवाह किया था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ता गया।
इसी विवाद के बीच पूर्व में एक हत्या का मामला भी सामने आया था, जिसमें हरिराम आरोपी था, हालांकि बाद में वह बरी हो गया। इस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच दुश्मनी और गहरी हो गई थी। महिलाओं के बीच भी अक्सर विवाद होते रहते थे, और लक्ष्मी यादव द्वारा मृतका को जान से मारने की धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई।
पुलिस विवेचना के दौरान विधि से संघर्षरत बालक को लक्ष्मी यादव के घर से हिरासत में लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने अपराध कबूल करते हुए बताया कि उन्होंने मिलकर सुनियोजित तरीके से दुरपती यादव की हत्या की थी। हत्या में प्रयुक्त भरमार बंदूक को लक्ष्मी यादव ने तोड़कर छिपा दिया था।
जांच के दौरान पुलिस ने लक्ष्मी यादव के गेरवानी स्थित मकान से टूटी हुई भरमार बंदूक बरामद की, जबकि विधि से संघर्षरत बालक से एक रिवाल्वर जब्त किया गया। वहीं, गोपाल यादव को उड़ीसा स्थित उसके ठिकाने से गिरफ्तार किया गया।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने इसे पूर्व नियोजित हत्या मानते हुए दोनों मुख्य आरोपियों को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले से क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे इस सनसनीखेज मामले का न्यायिक पटाक्षेप हो गया।
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