आरटीआई के बावजूद नहीं मिली जानकारी: कोसमोनदा पंचायत के पृथक्करण शेड निर्माण पर उठे सवाल
Journalist Amardeep chauhan
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पृथक्करण शेड निर्माण कार्य पर झोल।
सुचना के अधिकार पर खिलवाड़।
जानकारी देने में असमर्थ।
रायगढ़। जनपद पंचायत पुसौर अंतर्गत ग्राम पंचायत कोसमोनदा में वर्ष 2024-25 में हुए पृथक्करण शेड निर्माण कार्य को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित समय सीमा के बाद भी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे पूरे मामले में संदेह की स्थिति बनती जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदक पद्मनाभ प्रधान द्वारा निर्माण कार्य से संबंधित दस्तावेज और व्यय विवरण की जानकारी पाने के लिए आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया गया था। अधिनियम के तहत 30 दिनों के भीतर जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है, लेकिन तय समय बीत जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया गया।
इसके बाद आवेदक ने प्रथम अपील दायर की। जनपद पंचायत पुसौर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा सुनवाई के लिए बुलाए जाने पर आवेदक और ग्राम पंचायत सचिव दोनों उपस्थित हुए। इस दौरान सीईओ ने सचिव को जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, लेकिन बैठक में भी सचिव संतोषजनक जानकारी प्रस्तुत नहीं कर सके।
आवेदक का आरोप है कि इसके बाद भी लगातार प्रयासों और व्यक्तिगत मुलाकातों के बावजूद जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उन्होंने दो बार जनपद कार्यालय पहुंचकर सीईओ और संबंधित सचिव से संपर्क किया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि लगभग 4.10 लाख रुपये की लागत से हुए इस पृथक्करण शेड निर्माण कार्य में अनियमितता की आशंका हो सकती है, जिसके चलते जानकारी साझा करने में टालमटोल की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी विकास कार्य में पारदर्शिता बरती गई हो तो सूचना देने में किसी प्रकार की हिचक नहीं होनी चाहिए। ऐसे में जानकारी का लगातार रोका जाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित अधिकारी आरटीआई कानून का पालन सुनिश्चित करते हैं या नहीं, और क्या इस मामले में उच्च स्तर पर जांच की जरूरत महसूस की जाती है। फिलहाल, यह मुद्दा प्रशासनिक जवाबदेही और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता की कसौटी बनता जा रहा है।
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