जंतर-मंतर पर ‘जवाबदेही की जंग’: सोनम वांगचुक के अनशन ने पकड़ा देशव्यापी स्वर, कलाकारों-राजनीतिज्ञों का बढ़ता समर्थन

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
विशेष रिपोर्ट | नई दिल्ली
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध अब महज़ एक धरना नहीं रह गया है, बल्कि यह चुनी हुई सरकार से जवाबदेही मांगने की एक व्यापक जन-आवाज़ में तब्दील होता दिख रहा है। लद्दाख के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनके गिरते स्वास्थ्य के बीच अब देश के राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां खुलकर उनके समर्थन में सामने आई हैं।
स्वास्थ्य गिरा, चिंता बढ़ी—लेकिन आंदोलन जारी
मंगलवार को जारी मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक, वांगचुक का वज़न करीब 8.5 किलोग्राम तक कम हो चुका है और उनका ब्लड प्रेशर 109/70 दर्ज किया गया है। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को चिंताजनक बताया है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अनशन जारी रखने का निर्णय दोहराया है।
इस आंदोलन की पृष्ठभूमि नीट पेपर लीक मामले से जुड़ी मांगों और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों से जुड़ी है। धरनास्थल पर अन्य प्रदर्शनकारी भी भूख हड़ताल में शामिल हैं।
राजनीतिक समर्थन और अपील
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने घोषणा की है कि वह स्वयं जंतर-मंतर पहुंचकर समर्थन जताएंगे। इससे पहले भी विभिन्न विपक्षी नेताओं द्वारा वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई जा चुकी है।
फ़िल्म और कला जगत का खुला समर्थन
इस आंदोलन को सबसे मुखर समर्थन फिल्म और कला जगत से मिल रहा है। वरिष्ठ अभिनेता प्रकाश राज लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं और हाल ही में जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात भी की।
प्रकाश राज ने कहा,
> “यह सिर्फ़ छात्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जवाबदेही की लड़ाई है। सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है।”
इसी कड़ी में पंजाबी गायक काका और टीवी जगत से जुड़े रघु राम भी धरनास्थल पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं।
बौद्धिक वर्ग की अपील—‘आंदोलन ज़रूरी, जीवन भी’
हालांकि कई बुद्धिजीवियों और कलाकारों ने समर्थन के साथ-साथ चिंता भी जताई है। लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और अर्थशास्त्री जयति घोष सहित कई हस्तियों ने संयुक्त बयान जारी कर वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है।
उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य महत्वपूर्ण है, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता करना चिंता का विषय है।
‘फुनसुख वांगडू’ से वास्तविक संघर्ष तक
सोनम वांगचुक को आम जनता में व्यापक पहचान 2009 की फिल्म 3 इडियट्स से मिली, जिसमें ‘फुनसुख वांगडू’ का किरदार उनसे प्रेरित बताया गया था।
अभिनेता ओमी वैद्य ने एक भावुक अपील में कहा कि,
> “आप उनसे सहमत हों या नहीं, लेकिन यह नहीं होना चाहिए कि एक सच्चा व्यक्ति यूं चुपचाप मर जाए।”
वहीं, दिग्गज अभिनेत्री ज़ीनत अमान ने भी सरकार से संवाद शुरू करने की मांग की है। उन्होंने लिखा कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा है।
सोशल मीडिया पर भी गूंज
अभिनेता अभय देओल ने प्रतीकात्मक रूप से समर्थन जताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा किया, जबकि अभिलाष थपलियाल ने भावुक वीडियो के ज़रिए इस आंदोलन के प्रति संवेदना व्यक्त की।
यह आंदोलन अब केवल एक मुद्दे तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें शिक्षा व्यवस्था, सरकारी जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे व्यापक सवाल शामिल हो गए हैं।
हालांकि, आंदोलन की वैधता और मांगों पर बहस जारी है, लेकिन एक बात स्पष्ट है—सोनम वांगचुक का अनशन अब देशव्यापी चर्चा का केंद्र बन चुका है।
आगे की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार संवाद का रास्ता चुनती है या टकराव का।
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