सामारुमा के जंगल में हाथियों का डेरा, शाम होते ही रायगढ़-घरघोड़ा मार्ग पर बढ़ रहा खतरा (देखें वीडियो)

एक सप्ताह से लगातार सड़क पार कर रहा हाथियों का झुंड, देखने और वीडियो बनाने जुट रही भीड़; पूंजीपथरा औद्योगिक क्षेत्र की गतिविधियों के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी उठ रहे सवाल
रायगढ़। रायगढ़-घरघोड़ा मुख्य मार्ग पर सामारुमा जंगल के समीप इन दिनों शाम ढलते ही एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। पिछले करीब एक सप्ताह से हाथियों का झुंड लगातार इस मार्ग के आसपास दिखाई दे रहा है और कई बार सड़क पार करते हुए आगे बढ़ रहा है। जंगल से निकलकर सड़क के किनारे पहुंचते हाथियों को देखने के लिए आसपास के ग्रामीणों के साथ राहगीरों की भीड़ भी जमा हो रही है। कई लोग हाथियों की तस्वीरें और वीडियो बनाने के लिए सड़क पर रुक जाते हैं, जिससे स्थिति कभी भी गंभीर हो सकती है।
मंगलवार-बुधवार सहित लगातार कई दिनों से शाम के समय हाथियों की आवाजाही देखे जाने की बात सामने आ रही है। तस्वीर में भी हाथियों का एक बड़ा झुंड सड़क के किनारे और सड़क को पार करते हुए नजर आ रहा है। झुंड में छोटे हाथी भी शामिल हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, तेज हॉर्न, भीड़ या वाहनों की अचानक आवाजाही हाथियों को उत्तेजित कर सकती है।

हाथियों के लिए यह केवल सड़क नहीं, पुराना आवागमन मार्ग
सामारुमा क्षेत्र का जंगल हाथियों की आवाजाही वाले इलाके के रूप में जाना जाता है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से इस क्षेत्र में हाथियों के आने-जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में यह कहना अधिक उचित होगा कि जिस रास्ते से इंसानों का आवागमन होता है, उसी भूभाग से वन्यजीव भी अपनी प्राकृतिक गतिविधियों के तहत गुजरते हैं।
रायगढ़ से घरघोड़ा और घरघोड़ा से रायगढ़ आने-जाने वाले लोगों के लिए यह प्रमुख मार्ग है। दूसरी ओर इसी क्षेत्र में पूंजीपथरा का औद्योगिक क्षेत्र भी जुड़ा हुआ है। औद्योगिक गतिविधियों, भारी वाहनों की आवाजाही और बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप के बीच जंगल एवं वन्यजीवों के आवागमन वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
हाथियों से ज्यादा खतरनाक बन सकती है उन्हें देखने जुटने वाली भीड़
हाथियों की मौजूदगी अपने आप में जितनी संवेदनशील है, उससे कहीं अधिक चिंता उस समय पैदा होती है जब लोग उनके बेहद करीब जाकर फोटो और वीडियो बनाने लगते हैं। सड़क पर वाहन रोककर हाथियों को देखने वालों की भीड़ बढ़ने से यातायात भी प्रभावित हो सकता है।
विशेषकर झुंड में यदि मादा हाथी और बच्चे मौजूद हों तो उनके आसपास लोगों की भीड़ या वाहनों की हलचल अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर सकती है। हाथियों के अचानक सड़क की ओर बढ़ने या वाहन की तरफ दौड़ने की स्थिति में राहगीरों के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय होगा।
वन विभाग की सक्रिय निगरानी जरूरी
लगातार एक सप्ताह से हाथियों की आवाजाही को देखते हुए इस मार्ग पर वन विभाग की नियमित निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। शाम के समय हाथियों की संभावित आवाजाही वाले स्थानों पर वन अमले की तैनाती, राहगीरों को दूर रखने के लिए बैरिकेडिंग अथवा आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था और वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए संकेतक लगाए जाने जैसे कदम तत्काल प्रभावी हो सकते हैं।
साथ ही लोगों को यह भी समझाने की जरूरत है कि हाथियों के करीब जाकर सेल्फी या वीडियो बनाना मनोरंजन नहीं, बल्कि गंभीर जोखिम है। वन विभाग स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों के बीच जागरूकता अभियान चलाकर उन्हें हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील कर सकता है।
वन्यजीव और इंसान, दोनों की सुरक्षा जरूरी
सामारुमा के जंगल में हाथियों की मौजूदगी एक ओर क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक वन क्षेत्र की अहमियत को सामने लाती है, तो दूसरी ओर मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावित चुनौती की ओर भी संकेत करती है। औद्योगिक गतिविधियों और सड़क यातायात के बीच वन्यजीवों के पारंपरिक आवागमन वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना समय की जरूरत है।
फिलहाल सबसे जरूरी है कि हाथियों को देखकर सड़क पर भीड़ न जुटे, वाहन चालक दूरी बनाए रखें और वन विभाग संवेदनशील समय में मौके पर निगरानी रखे। क्योंकि जंगल हाथियों का घर है और सड़क पर इंसानों की आवाजाही—दोनों के बीच संतुलन बनाना ही इस पूरे क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती है।
फोटो : आयुष
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