रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में ‘ब्लैक रिबन’ से बिगुल: 4 दिन का अल्टीमेटम, 21 से ओपीडी और 23 से इमरजेंसी ठप करने की चेतावनी

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़। जिले के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों का असंतोष अब खुलकर सड़क पर आ गया है। वेतन और स्टाइपेंड से जुड़ी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और बॉन्डेड जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत कर दी है। गुरुवार को डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया और अस्पताल परिसर में शांतिपूर्ण रैली निकालते हुए सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की।
डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि चार दिनों के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 21 सितंबर से ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं निकलने पर 23 सितंबर से आपातकालीन सेवाएं बंद कर पूर्ण कार्यबहिष्कार का रास्ता अपनाया जाएगा। यह स्थिति बनी तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा असर पड़ना तय है।
आंदोलन से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि वे मरीजों को असुविधा पहुंचाना नहीं चाहते, लेकिन लंबे समय से लंबित मांगों और अनदेखी के कारण अब उनके पास विकल्प सीमित रह गए हैं। उनका आरोप है कि सरकार स्तर पर स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर पूर्व में आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ।
मांग पत्र में एमबीबीएस इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी, पीजी और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के वेतन में संशोधन, साथ ही डीएम और एमसीएच सुपरस्पेशलिटी कोर्स के डॉक्टरों के स्टाइपेंड में सुधार प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा अस्पतालों में बुनियादी संसाधनों की उपलब्धता, कार्य-परिस्थितियों में सुधार और विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी सेवा में बनाए रखने के लिए ठोस नीति की भी मांग की गई है।
प्रेस वार्ता में डॉक्टर प्रतिनिधियों ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था केवल घोषणाओं और प्रचार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर डॉक्टरों और मरीजों दोनों को राहत देने वाली होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन टकराव के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार और अपने अधिकारों की मांग के लिए किया जा रहा है।
हालांकि, संभावित हड़ताल को देखते हुए मरीजों और उनके परिजनों में चिंता बढ़ने लगी है। यदि तय कार्यक्रम के अनुसार सेवाएं बाधित होती हैं, तो सबसे अधिक असर गरीब और दूरदराज से आने वाले मरीजों पर पड़ सकता है। अब नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह बातचीत का रास्ता अपनाती है या टकराव की स्थिति और गहराती है।
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