आज रायगढ़ पहुंचेंगे हर्ष मंदर, जनसंवाद से लेकर जमीनी मुद्दों तक कल रहेगा पूरा दिन केंद्रित

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़। जिले के पूर्व कलेक्टर एवं बिलासपुर संभाग के पूर्व कमिश्नर रहे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर का आज रायगढ़ आगमन प्रस्तावित है। तय कार्यक्रम के अनुसार वे आज देर शाम/रात्रि में शहर पहुंचेंगे। उनके आगमन को लेकर जिले के सामाजिक, शैक्षणिक और बौद्धिक वर्ग में खासी सक्रियता देखी जा रही है। कई संगठनों ने उनके स्वागत और संवाद कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, हर्ष मंदर 16 सितंबर को सुबह से ही विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। दिन की शुरुआत शहर स्थित साईं श्रद्धा होटल में प्रस्तावित जनसंवाद से होगी, जहां सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, पत्रकारों और पूर्व साक्षरता कर्मियों के साथ विस्तृत चर्चा होगी। इस संवाद में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, अधिकार आधारित योजनाओं की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक अनुभवों के साझा होने की संभावना है। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्दों को समझने और समाधान की दिशा में विचार-विमर्श का गंभीर मंच साबित हो सकता है।
दोपहर बाद उनका दौरा केलो विहार कॉलोनी की ओर रहेगा, जहां वे करीब 4 बजे पहुंचकर वहां के निवासियों और समिति के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। यह वही क्षेत्र है, जिसके विकास और संरचना से उनके प्रशासनिक कार्यकाल की यादें जुड़ी रही हैं। स्थानीय स्तर पर इस कार्यक्रम को भावनात्मक जुड़ाव के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि लंबे समय बाद वे इस क्षेत्र में सीधे लोगों के बीच उपस्थित रहेंगे।
शाम के समय उनका कार्यक्रम सामाजिक संस्थानों के निरीक्षण और संवाद का रहेगा। वे अपने कार्यकाल में शुरू किए गए वृद्धाश्रम और कुष्ठ उन्मूलन से जुड़े केंद्रों का दौरा कर वहां रह रहे लोगों से मुलाकात करेंगे और वर्तमान व्यवस्थाओं की जानकारी लेंगे। सूत्रों के अनुसार, इन केंद्रों की स्थिति और जरूरतों को लेकर भी चर्चा संभव है।
गौरतलब है कि हर्ष मंदर का रायगढ़ से जुड़ाव केवल प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सरोकारों के स्तर पर भी गहरा रहा है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने साक्षरता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने, ‘लोक शक्ति समिति’ के गठन और अधिकार आधारित योजनाओं को व्यवहारिक रूप देने की दिशा में कई पहलें की थीं। मितानिन कार्यक्रम, ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी और वनाधिकार जैसे विषयों पर भी उनकी सक्रिय भूमिका रही।
बाद में उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक रूप से अलग होकर सामाजिक क्षेत्र में कार्य करना चुना और वर्तमान में दिल्ली में वंचित वर्गों, विशेषकर बच्चों और बेसहारा परिवारों के लिए काम कर रहे हैं। इसके बावजूद रायगढ़ के साथ उनका संबंध समय-समय पर उनके दौरे और संवाद के माध्यम से बना रहा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी के अनुसार, “हर्ष मंदर का यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जिले के लिए आत्ममंथन और दिशा तय करने का अवसर भी हो सकता है।”
जिले के विभिन्न संगठनों और बुद्धिजीवियों को उम्मीद है कि यह दौरा आने वाले समय में सामाजिक मुद्दों पर नई पहल और संवाद की राह खोलेगा।
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