एनटीपीसी तलाईपाली परियोजना में ‘कथित सौदेबाजी’ का साया: प्रभावित गांवों के नाम पर करोड़ों के लेन-देन का आरोप, एसपी से निष्पक्ष जांच की गुहार

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़।
एनटीपीसी की तलाईपाली कोयला खनन परियोजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला केवल मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार तक सीमित नहीं, बल्कि कथित तौर पर करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन तक पहुंच गया है। परियोजना से प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक रायगढ़ के समक्ष लिखित शिकायत देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि तलाईपाली, बिछीनारा, रायकेरा, नयारामपुर, अजितगढ़, कुदुरमौहा, साल्हेपाली और छोटीगुड़ा—इन आठ गांवों के लोग लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। उनकी प्रमुख मांगों में पुनर्वास नीति के तहत जमीन का चार गुना मुआवजा, तेंदूपत्ता का भुगतान और स्थानीय लोगों को रोजगार शामिल है।
लेकिन शिकायत में जो आरोप सामने आए हैं, उन्होंने पूरे आंदोलन की दिशा और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना, एक कथित मध्यस्थ के जरिए परियोजना से जुड़े अधिकारियों और एक निजी कंपनी के बीच समझौता किया गया। आरोप यह भी है कि आंदोलन समाप्त कराने के बदले 5 से 7 करोड़ रुपये तक की राशि का लेन-देन हुआ।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि उक्त राशि संबंधित व्यक्ति और उसके परिजनों के बैंक खातों में जमा कराई गई। ग्रामीणों ने इस पूरे घटनाक्रम में एनटीपीसी परियोजना के एक वरिष्ठ अधिकारी—अच्युतानंद साहू (एजीएम)—की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और जांच की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, कथित राशि मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति गांव छोड़कर चला गया है और अब संपर्क में नहीं है। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, वे न तो अपने मकान तोड़ेंगे और न ही जमीन छोड़ेंगे।
शिकायत में पुलिस प्रशासन से यह अपेक्षा जताई गई है कि कथित वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की गहराई से जांच की जाए। साथ ही दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत की प्रतिलिपि एसडीएम घरघोड़ा, एनटीपीसी प्रबंधन, कोल माइनिंग मुख्यालय, बिलासपुर संभाग के आयुक्त, खनिज संसाधन विभाग, राजस्व विभाग और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।
अब यह मामला केवल एक परियोजना विवाद नहीं रह गया है, बल्कि पारदर्शिता, विश्वास और प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन गया है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी—और यह भी स्पष्ट करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।



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