छत्तीसगढ़ से झारखंड तक खुलेगा रेल का नया रास्ता, जशपुर-कुनकुरी-पत्थलगांव को पहली बार मिलेगी ट्रेन की सौगात!

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन को विशेष परियोजना का दर्जा, करीब 291 किमी के प्रस्तावित रेल कॉरिडोर से बदलेगी सीमावर्ती इलाकों की तस्वीर
रायगढ़/जशपुर। छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच रेल संपर्क को लेकर लंबे समय से चली आ रही उम्मीदों को अब नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है। धरमजयगढ़ से झारखंड के लोहरदगा तक प्रस्तावित नई रेल लाइन परियोजना को रेल मंत्रालय द्वारा ‘विशेष रेल परियोजना’ के तौर पर अधिसूचित किए जाने के बाद इस महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।
प्रस्तावित रेल कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के धरमजयगढ़ से शुरू होकर पत्थलगांव, कुनकुरी और जशपुर होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक पहुंचेगा। करीब 291 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित रेल लाइन न केवल दो राज्यों के बीच सीधा रेल संपर्क मजबूत कर सकती है, बल्कि जशपुर जैसे उन इलाकों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जो अब तक रेल नेटवर्क से अपेक्षाकृत दूर रहे हैं।
हालांकि परियोजना की घोषणा और अधिसूचना के बाद भी जमीन पर निर्माण शुरू होने, पूरा होने की समय-सीमा और यात्री ट्रेनों के संचालन को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित प्रक्रियाओं और स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी। इसलिए फिलहाल इसे भविष्य के संभावित रेल संपर्क के रूप में देखा जाना चाहिए।
जशपुर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने की उम्मीद
जशपुर जिले के लिए यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जिले के बड़े हिस्से में अभी प्रत्यक्ष रेल संपर्क उपलब्ध नहीं है। लंबे समय से क्षेत्र के लोग रेल सुविधा की मांग करते रहे हैं।
धरमजयगढ़–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर होते हुए लोहरदगा तक रेल लाइन बनने की स्थिति में जशपुर अंचल का संपर्क झारखंड के रेल नेटवर्क से मजबूत होगा। इसके आगे लोहरदगा के रास्ते क्षेत्र के यात्रियों को रांची और देश के दूसरे हिस्सों से जुड़ने के नए विकल्प मिल सकते हैं।
धरमजयगढ़ से लोहरदगा तक करीब 291 किमी का कॉरिडोर
प्रस्तावित परियोजना की लंबाई करीब 291 किलोमीटर बताई गई है। इसका प्रस्तावित मार्ग छत्तीसगढ़ और झारखंड के सीमावर्ती तथा आदिवासी बहुल क्षेत्रों से होकर गुजरेगा।
प्रस्तावित प्रमुख पड़ाव—
धरमजयगढ़ → पत्थलगांव → कुनकुरी → जशपुर → लोहरदगा
यह मार्ग आकार लेने के बाद केवल यात्रियों के लिए आवागमन का साधन नहीं होगा, बल्कि कृषि उपज, स्थानीय उत्पाद और क्षेत्रीय व्यापार को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी भूमिका निभा सकता है। हालांकि इसका वास्तविक आर्थिक प्रभाव रेल लाइन के निर्माण, स्टेशन नेटवर्क, माल ढुलाई सुविधाओं और ट्रेन संचालन की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
‘विशेष रेल परियोजना’ का दर्जा क्यों महत्वपूर्ण?
रेल मंत्रालय की ओर से परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने को इस दिशा में अहम प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। इससे परियोजना से जुड़े भूमि, सर्वेक्षण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, स्वीकृति और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने का संस्थागत आधार मिलता है।
हालांकि विशेष रेल परियोजना की अधिसूचना को यह नहीं माना जा सकता कि पूरी रेल लाइन का निर्माण तत्काल शुरू हो गया है। निर्माण की वास्तविक गति बजट, भूमि उपलब्धता, तकनीकी स्वीकृतियों, पर्यावरणीय एवं अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं तथा रेलवे की आगे की कार्ययोजना पर निर्भर करेगी।
सड़क पर निर्भरता कम होने की उम्मीद
वर्तमान में जशपुर अंचल से झारखंड के प्रमुख शहरों तक आवाजाही के लिए बड़ी संख्या में लोगों को सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। खासकर लंबी दूरी की यात्रा में सड़क की स्थिति, मौसम और यातायात व्यवस्था का असर सफर के समय पर पड़ता है।
ऐसे में यदि प्रस्तावित रेल लाइन भविष्य में पूरी होकर यात्री ट्रेनों के संचालन तक पहुंचती है तो जशपुर, कुनकुरी और पत्थलगांव सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आवागमन का अपेक्षाकृत सुविधाजनक विकल्प मिल सकता है।
रेल लाइन आई तो बदल सकती है इलाके की आर्थिक तस्वीर
किसी पिछड़े या दूरस्थ क्षेत्र में रेल संपर्क केवल यात्रियों के लिए सुविधा नहीं लाता, बल्कि उसके साथ आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी जुड़ती हैं। नए स्टेशन बनने से आसपास बाजार विकसित हो सकते हैं, स्थानीय कारोबार को गति मिल सकती है और शिक्षा, रोजगार तथा स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच आसान हो सकती है।
जशपुर और आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, कृषि, वनोपज और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। रेल संपर्क बेहतर होने पर इन क्षेत्रों से जुड़े स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
लंबे इंतजार के बाद उम्मीद की नई किरण
जशपुर अंचल में रेल की मांग कोई नई बात नहीं है। वर्षों से क्षेत्र के लोग रेल संपर्क को विकास की बुनियादी जरूरत के रूप में देखते आए हैं। ऐसे में धरमजयगढ़ से लोहरदगा तक प्रस्तावित रेल लाइन की अधिसूचना ने इस मांग को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
फिलहाल सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि कागज पर दर्ज यह रेल कॉरिडोर सर्वे, भूमि और स्वीकृतियों की प्रक्रिया से आगे बढ़कर वास्तविक निर्माण तक पहुंचे। यदि परियोजना धरातल पर उतरती है तो धरमजयगढ़ से लेकर पत्थलगांव, कुनकुरी और जशपुर होते हुए लोहरदगा तक का यह रेल मार्ग दो राज्यों के बीच केवल दूरी नहीं घटाएगा, बल्कि लंबे समय से रेल मानचित्र से दूर रहे एक बड़े भूभाग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर सकता है।
यानी अभी ट्रेन की सीटी सुनाई देने में वक्त लग सकता है, लेकिन धरमजयगढ़ से लोहरदगा तक रेल की पटरी बिछने की उम्मीद ने जशपुर अंचल के लोगों के लिए विकास और बेहतर कनेक्टिविटी का एक नया सपना जरूर जगा दिया है।
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