अभियान संवेदना — 4 वर्षों से लापता दुष्कर्म पीड़िता को घरघोड़ा पुलिस ने खोज निकाला

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़/घरघोड़ा, 12 अगस्त। न्याय की राह में सबसे बड़ी बाधा तब खड़ी होती है जब पीड़ित ही व्यवस्था से ओझल हो जाए। रायगढ़ जिले में एक ऐसे ही संवेदनशील पॉक्सो प्रकरण में करीब चार वर्षों से लापता नाबालिग पीड़िता को खोज निकालते हुए घरघोड़ा पुलिस ने न केवल मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी फिर से गति प्रदान की है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चलाए गए “अभियान संवेदना” के तहत पुलिस ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम दिया। विशेष टीम की सतत प्रयासों के बाद 10 अगस्त 2026 को पीड़िता को रायगढ़ से सकुशल बरामद किया गया और अगले ही दिन 11 अगस्त को उसे माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया।
यह मामला वर्ष 2021 के एक गंभीर अपराध से जुड़ा है, जिसमें थाना घरघोड़ा में दर्ज अपराध क्रमांक 232/2021 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 एवं पॉक्सो अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था। मामला विशेष न्यायाधीश, एफ.टी.एस.सी. (पॉक्सो) न्यायालय घरघोड़ा में विचाराधीन था।
लापता होने से अटकी थी सुनवाई
न्यायालय में विचारण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे थे। इसी बीच वर्ष 2022 में पीड़िता के अचानक लापता हो जाने से मामला ठहराव की स्थिति में पहुंच गया। न्यायालय द्वारा बार-बार समंस जारी किए जाने के बावजूद पीड़िता की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
सघन तलाश, कई जिलों में अभियान
पीड़िता की तलाश को प्राथमिकता देते हुए पुलिस ने डीएसपी स्तर पर मॉनिटरिंग के साथ एक विशेष टीम गठित की। थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू के नेतृत्व में टीम ने पीड़िता के परिजनों, परिचितों और संभावित संपर्कों से लगातार पूछताछ की।
सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि पुलिस टीम ने रायगढ़ सहित अन्य जिलों में भी संभावित ठिकानों पर दबिश दी। औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, कोयला खदानों और शहरी झुग्गी बस्तियों तक में तलाश अभियान चलाया गया। लगातार प्रयासों और सूचनाओं के विश्लेषण के बाद आखिरकार टीम को सफलता मिली और पीड़िता को रायगढ़ से बरामद कर लिया गया।
न्याय की दिशा में अहम कड़ी
करीब चार वर्षों बाद पीड़िता की न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित होना इस मामले में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। अब न्यायिक प्रक्रिया को गति मिलने के साथ ही आरोपियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की राह भी स्पष्ट हो गई है।
टीम की भूमिका सराहनीय
इस पूरे अभियान में थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव साहू के साथ आरक्षक दिनेश सिदार, प्रदीप तिग्गा और हरीश पटेल की भूमिका उल्लेखनीय रही। सीमित संसाधनों और जटिल परिस्थितियों के बीच टीम ने जिस धैर्य और सतर्कता से काम किया, वह पुलिसिंग के संवेदनशील पहलू को रेखांकित करता है।
एसएसपी का स्पष्ट संदेश
एसएसपी ने कहा कि “नाबालिग पीड़ितों को न्याय दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कोई भी पीड़ित वर्षों तक लापता क्यों न रहे, उसकी तलाश और उसे न्यायिक प्रक्रिया से जोड़ने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे। दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना हमारी जिम्मेदारी है।”
रायगढ़ पुलिस की इस कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि लंबित मामलों में भी यदि इच्छाशक्ति और समन्वित प्रयास हों, तो न्याय की राह फिर से खोली जा सकती है।
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