“न्याय दिलाने” का झांसा, 7.70 लाख की ठगी: पीड़िता फूलमती दोहरे धोखे की शिकार

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़/लैलूंगा।
रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोड़केल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो न सिर्फ मानवीय संवेदनाओं को झकझोरता है, बल्कि “न्याय दिलाने” के नाम पर चल रहे कथित खेल की भी परतें खोलता है। यहां रहने वाली पीड़िता फूलवती (परिवर्तित नाम) ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय और लैलूंगा थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि पहले उसके साथ रिश्ते के नाम पर धोखा हुआ, और फिर न्याय दिलाने का भरोसा देकर उससे 7 लाख 70 हजार रुपये की ठगी कर ली गई।
शिकायत के अनुसार, फूलमती का पिछले करीब 15 वर्षों से उजागर सिदार नामक व्यक्ति के साथ पति-पत्नी जैसे संबंध रहे। पीड़िता का आरोप है कि इस दौरान दोनों साथ रहे, लेकिन हाल ही में उजागर सिदार ने बिना किसी पूर्व जानकारी के दूसरी महिला से विवाह कर लिया और अब फूलमती को अपनाने से साफ इनकार कर दिया। खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही फूलमती ने इस मामले में न्याय की मांग को लेकर लैलूंगा थाना और एसपी कार्यालय का दरवाजा खटखटाया।
इसी बीच, कथित तौर पर “मददगार” बनकर सामने आए कुछ लोगों ने उसकी स्थिति का फायदा उठा लिया। शिकायत में बताया गया है कि बिलासपुर की रहने वाली सरोज केरकेट्टा, संजय मिश्रा, पद्मिनी और एक अन्य व्यक्ति ने खुद को प्रभावशाली और मामले को सुलझाने में सक्षम बताकर फूलवती का विश्वास जीता। आरोप है कि इन्होंने उसे न्याय दिलाने और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करवाने का भरोसा दिया।
विश्वास में लेने के बाद, इन लोगों ने अलग-अलग बहानों से पीड़िता से कुल 7 लाख 70 हजार रुपये वसूल लिए। यह रकम आंशिक रूप से नकद और आंशिक रूप से ऑनलाइन भुगतान (फोन-पे) के माध्यम से सरोज केरकेट्टा और पद्मिनी के खातों में ट्रांसफर करवाई गई।
पीड़िता का कहना है कि जैसे ही पूरी राशि उनके हाथ लगी, आरोपियों ने उसका फोन नंबर ब्लॉक कर दिया और संपर्क पूरी तरह से बंद कर दिया। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है और इसे संगठित ठगी या अवैध वसूली के रूप में देखा जा रहा है।
मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ जाती है कि आरोपियों ने खुद को “न्याय दिलाने वाला” (पत्रकार) और प्रभावशाली बताकर एक पीड़ित महिला का आर्थिक शोषण किया। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल आपराधिक कृत्य है, बल्कि समाज में भरोसे और सहायता की भावना को भी गहरा आघात पहुंचाने वाला है।
फिलहाल, पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। संबंधित खातों के लेन-देन की पड़ताल और आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि न्याय के नाम पर सक्रिय ऐसे तत्वों पर किस तरह से अंकुश लगाया जाए, जो पहले से पीड़ित लोगों को ही निशाना बनाकर उनका शोषण कर रहे हैं।
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