कुंजेमुरा का नाला बना ‘काला दरिया’: शारदा एनर्जी की खदान से बह रहा प्रदूषण, ग्रामीणों में आक्रोश (देखें वीडियो)

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
कुंजेमुरा (रायगढ़)।
जिले के तमनार क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुंजेमुरा में पर्यावरणीय लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शारदा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड की खदान से निकलने वाला कोयला मिश्रित दूषित पानी—जिसे स्थानीय लोग ‘काला पानी’ कह रहे हैं—सीधे गांव के नाले में छोड़ा जा रहा है। इससे नाले का पानी पूरी तरह काला पड़ गया है और आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल असर साफ नजर आने लगा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, बीते कुछ दिनों से नाले के पानी का रंग और स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां यह नाला खेतों की सिंचाई और मवेशियों के उपयोग के लिए काम आता था, वहीं अब इसकी स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि पास जाने पर बदबू और काले झाग स्पष्ट दिखते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रदूषित पानी से फसलों पर भी असर पड़ रहा है और जमीन की उर्वरता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि बरसात के मौसम में खदानों से बहकर आने वाला यह कचरा और रसायनयुक्त पानी नाले के जरिए सीधे खेतों और जल स्रोतों तक पहुंच रहा है। इससे न केवल जल स्रोत दूषित हो रहे हैं, बल्कि भूजल स्तर पर भी खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले समय में पेयजल संकट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
इस पूरे मामले में अब तक संबंधित कंपनी या प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार मौखिक शिकायत की, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। ऐसे में अब वे लिखित शिकायत कर उच्च स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग करने की तैयारी में हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो खदानों से निकलने वाले इस तरह के अपशिष्ट को बिना उपचार के खुले जल स्रोतों में छोड़ना गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इससे जल, मिट्टी और जैव विविधता तीनों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
मांग और सवाल:
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर किसकी अनुमति से खदान का यह दूषित पानी सीधे नाले में छोड़ा जा रहा है और निगरानी तंत्र क्यों मौन है?
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कुंजेमुरा के इस ‘काले नाले’ को साफ करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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