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मृत्यु के बाद भी रोशनी बन गईं कुसुम जैन: नेत्रदान से दो जिंदगियों में जगा उजाला

Journalist Amardeep Chauhan
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रायगढ़। संवेदनाओं से भरी एक मिसाल ने शहर को न केवल भावुक किया, बल्कि समाज को एक नई दिशा भी दी। श्रीमती कुसुम जैन (पत्नी – श्री रजनीकांत जैन) के निधन के बाद उनके परिजनों ने जिस साहस और मानवीय दृष्टिकोण का परिचय दिया, वह आज के समय में प्रेरणा का विषय बन गया है। 3 अगस्त की शाम 5:35 बजे उनके निधन के तुरंत बाद परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लेकर मानवता की एक ऐसी ज्योति जलाई, जो लंबे समय तक समाज को मार्गदर्शन देती रहेगी।

शोक की घड़ी में जहां सामान्यतः परिवार दुख और विछोह में डूब जाता है, वहीं जैन परिवार ने अपने व्यक्तिगत दुःख से ऊपर उठकर समाजहित में निर्णय लिया। श्रीमती कुसुम जैन के नेत्र अब दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला भरेंगे। यह केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदना, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का सजीव उदाहरण है।

नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया मेडिकल कॉलेज की डॉ. शेफाली अग्रवाल एवं उनकी टीम की निगरानी में विधिवत संपन्न हुई। चिकित्सकीय टीम ने समयबद्धता और सावधानी के साथ यह सुनिश्चित किया कि दान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो सके।

इस पुनीत कार्य में देवकी रामधारी फाउंडेशन के श्री दीपक अग्रवाल, श्री प्रज्वल अग्रवाल एवं श्री आशीष अग्रवाल की सक्रिय भागीदारी रही। साथ ही मारवाड़ी युवा मंच के सदस्यों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए इस मानवीय पहल के प्रति समर्थन जताया।

दिवंगत श्रीमती कुसुम जैन अपने पीछे एक सुसंस्कृत और जागरूक परिवार छोड़ गई हैं, जिसमें उनके पति श्री रजनीकांत जैन तथा पुत्र श्री रजत जैन, श्री मनीष जैन और श्री तनय जैन शामिल हैं। परिवार के इस निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया कि संस्कार और सामाजिक चेतना किस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में भी श्रेष्ठ निर्णय लेने की शक्ति देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़े और लोग मरणोपरांत इस दिशा में संकल्प लें, तो हजारों दृष्टिहीन लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है। यह एक ऐसा दान है, जो मृत्यु के बाद भी जीवन को अर्थ देता है।

श्रीमती कुसुम जैन की यह अंतिम इच्छा और उनके परिवार का निर्णय आने वाले समय में निश्चित रूप से लोगों को प्रेरित करेगा। यह घटना हमें याद दिलाती है कि जीवन का अंत भले ही निश्चित हो, लेकिन उससे जुड़ी संवेदनाएं और निर्णय किसी और के जीवन की नई शुरुआत बन सकते हैं।

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Amar Chouhan

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