केलो की ओर बहता ज़हर: रायगढ़ में फ्लाई ऐश डंपिंग का ‘खुला खेल’, बरसात ने खोली सिस्टम की पोल

Journalist Amardeep chauhan
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रायगढ़। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर कड़े नियम और अदालतों की सख्ती—लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आती है। रायगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में जलस्रोतों में फ्लाई ऐश (औद्योगिक राख) की अवैध डंपिंग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बरसात के मौसम ने उस सच्चाई को उजागर कर दिया है, जिसे महीनों पहले कागजों में ‘दफन’ कर दिया गया था।
बरपाली ग्राम के बरदे नाले से सामने आए ताजा दृश्य यह बताने के लिए काफी हैं कि किस तरह प्राकृतिक जलधाराओं को सुनियोजित तरीके से राख से पाटा जा रहा है। नाले के दोनों किनारों पर भारी मात्रा में डंप की गई फ्लाई ऐश अब बारिश के पानी के साथ घुलकर सीधे केलो नदी की ओर बह रही है—वही नदी, जिस पर शहर और आसपास के गांवों की जल निर्भरता टिकी है।
‘मिट्टी से ढका सच’, बारिश ने किया बेनकाब
स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब आठ महीने पहले इसी नाले में फ्लाई ऐश डंपिंग की शिकायत की गई थी। जांच के नाम पर विभागीय अमला मौके पर पहुंचा, लेकिन स्थायी समाधान के बजाय राख के ऊपर मिट्टी डालकर मामला शांत कर दिया गया। कुछ औपचारिक कार्रवाई और मामूली जुर्माने के बाद फाइल बंद हो गई।
अब, जब बारिश ने उस मिट्टी की परत को बहा दिया है, तो नीचे दबा ‘राख का पहाड़’ फिर से सामने आ गया है। पानी के साथ बहती राख न सिर्फ नाले की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि आगे जाकर केलो नदी को भी प्रदूषित कर रही है।
उद्योगों पर उंगलियां, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि यह फ्लाई ऐश आसपास संचालित औद्योगिक इकाइयों से लाई गई है। खास तौर पर कुछ प्लांट्स और परिवहन से जुड़े लोगों पर संदेह जताया जा रहा है। आरोप यह भी है कि राख को निस्तारण के तय मानकों के बजाय सस्ते और अवैध तरीके से नालों व खाली जमीनों में डंप कर दिया जाता है।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल पर्यावरणीय लापरवाही नहीं, बल्कि नियमों की खुली अवहेलना और सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का मामला बनता है।
‘राख’ की चपेट में जीवन
यह समस्या किसी एक नाले तक सीमित नहीं है। गेरवानी, सरायपाली और घरघोड़ा रोड के आसपास का इलाका लंबे समय से फ्लाई ऐश प्रदूषण की मार झेल रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि—
– घरों के आंगन में राख की परत जम जाती है
– पेयजल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं
– कपड़ों और फसलों तक पर इसका असर दिखता है
इसके बावजूद कार्रवाई अक्सर तभी होती है, जब मामला मीडिया या जनदबाव में आता है।
प्रशासन और विभाग की अग्निपरीक्षा
बरदे नाले का यह मामला अब जिला प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण मंडल के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। वीडियो और प्रत्यक्ष प्रमाणों के सामने आने के बाद यह देखना अहम होगा कि—
– क्या जिम्मेदार इकाइयों की पहचान कर सख्त कार्रवाई होगी?
– क्या अवैध डंपिंग की पूरी चेन (उद्योग से लेकर ट्रांसपोर्ट तक) पर शिकंजा कसा जाएगा?
– या फिर एक बार फिर ‘लीपापोती’ कर मामला शांत कर दिया जाएगा?
रायगढ़ में फ्लाई ऐश डंपिंग का यह मामला केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही का भी परीक्षण है। केलो नदी की ओर बहता यह ‘धीमा जहर’ आने वाले समय में बड़े खतरे का संकेत है। सवाल सीधा है—क्या इस बार जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह राख यूं ही नदियों में बहती रहेगी?
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