जिला जेल में ‘सतर्कता की दस्तक’: आकस्मिक निरीक्षण के बाद प्रशासन सख्त, अवैध गतिविधियों पर जीरो टॉलरेंस

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 3 जुलाई 2026। हाल के दिनों में जिला जेल से जुड़ी दो बंदियों की आकस्मिक मृत्यु और गुटीय झड़पों की खबरों के बीच प्रशासन हरकत में आ गया है। शुक्रवार को कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने जिला जेल रायगढ़ का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत परखी। इस निरीक्षण को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर प्रशासन की गंभीरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और निगरानी तंत्र की विस्तार से समीक्षा की। उनके साथ सहायक कलेक्टर गोकुल आर.के., एडीएम अपूर्व प्रियेश टोप्पो समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

बैरकों से अस्पताल तक, हर व्यवस्था की परख
अधिकारियों ने बंदी बैरकों, जेल अस्पताल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष, प्रिजन कॉलिंग सिस्टम, मुलाकात कक्ष और पाकशाला का बारीकी से निरीक्षण किया। स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर सीधे सवाल किए गए और मौके पर ही आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि शासन द्वारा निर्धारित सभी सुविधाएं हर बंदी तक समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पहुंचनी चाहिए। जेल को केवल हिरासत स्थल नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास के केंद्र के रूप में विकसित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।

बंदियों और परिजनों से सीधा संवाद
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं और सुझाव सुने। साथ ही मुलाकात कक्ष में मौजूद परिजनों से भी चर्चा की गई। परिजनों को आश्वस्त किया गया कि यदि किसी प्रकार की मारपीट, अवैध वसूली या अन्य अनियमितता की जानकारी मिले, तो तुरंत शिकायत करें—प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।

सुरक्षा में खामियों पर सख्त रुख
निरीक्षण के दौरान जेल परिसर में प्रतिबंधित सामग्री के प्रवेश की संभावित कमजोर कड़ियों की पहचान की गई। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि ऐसी सभी खामियों को तत्काल दूर किया जाए और निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जाए। साफ शब्दों में कहा गया कि जेल के भीतर किसी भी तरह की अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पृष्ठभूमि: घटनाओं के बाद बढ़ी सतर्कता
गौरतलब है कि हाल ही में जिला जेल में दो बंदियों की आकस्मिक मौत और दो गुटों के बीच झड़प की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में यह आकस्मिक निरीक्षण न केवल स्थिति की समीक्षा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
जिला जेल का यह निरीक्षण प्रशासन के लिए एक चेतावनी संकेत भी है और सुधार की दिशा में पहल भी। अब देखने वाली बात यह होगी कि दिए गए निर्देशों का क्रियान्वयन कितनी गंभीरता से होता है और क्या वाकई जेल परिसर को सुरक्षित, पारदर्शी और सुधारोन्मुख बनाया जा सकेगा।
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