कंचनपुर में रेल हादसा: बुजुर्ग की दर्दनाक मौत! अब भड़क रहा जनाक्रोश, जवाबदेही तय करने की है आवश्यकता…

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़/घरघोड़ा।
घरघोड़ा थाना क्षेत्र के कंचनपुर में शनिवार शाम हुआ रेल हादसा सिर्फ एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लगातार हो रही लापरवाहियों की कड़ी का हिस्सा बनकर सामने आया है। एनटीपीसी तिलाईपाली टाउनशिप के पास रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने से 60 वर्षीय ग्रामीण मोहन सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक के साथ-साथ गहरा आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।
मृतक मोहन सिंह, पिता रिखी राम, निवासी कंचनपुर, रोजमर्रा के काम से निकले थे। शाम करीब 5 बजे के आसपास वे रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे, तभी अचानक तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसा इतना भीषण था कि संभलने का मौका तक नहीं मिला।
सूचना मिलते ही घरघोड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर इसे दुर्घटना माना जा रहा है, लेकिन परिस्थितियों की बारीकी से जांच की जा रही है।

पहले भी चेतावनी दे चुकी हैं ये पटरियां
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ ही दिन पहले इसी क्षेत्र में एक गर्भवती हथिनी की भी ट्रेन से कटकर दर्दनाक मौत हो चुकी है। उस घटना ने भी लोगों को झकझोर दिया था, लेकिन बावजूद इसके न तो सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई और न ही कोई ठोस कदम उठाए गए।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि यह महज संयोग नहीं, बल्कि व्यवस्थागत लापरवाही का नतीजा है। जंगल और आबादी के बीच से गुजरने वाली इस रेलवे लाइन पर न तो पर्याप्त फेंसिंग है, न चेतावनी संकेत, और न ही किसी तरह की निगरानी व्यवस्था।

ग्रामीणों में उबाल
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब तक यहां ठोस सुरक्षा उपाय नहीं किए जाते, तब तक इस तरह की घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
जिम्मेदारी किसकी?
लगातार हो रही मौतों ने कई विभागों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
भारतीय रेल: ट्रैक के किनारे फेंसिंग, चेतावनी संकेत और सुरक्षित पार-पथ (अंडरपास/ओवरब्रिज) की व्यवस्था करना।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे: संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर सुरक्षा मानकों को लागू करना।
NTPC Limited: टाउनशिप और आसपास के क्षेत्रों में मानवीय और वन्यजीव सुरक्षा के लिए समन्वय करना।
जिला प्रशासन, रायगढ़: जोखिम वाले क्षेत्रों में समुचित प्रबंधन और निगरानी सुनिश्चित करना।
वन विभाग: वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय और अलर्ट सिस्टम विकसित करना।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक इंसान और वन्यजीव इस तरह लापरवाही का शिकार होते रहेंगे? फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन जनता अब जवाब से ज्यादा ठोस कार्रवाई चाहती है।
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