Latest News

रायगढ़ में कथित ‘जमीन खेल’ की परतें खुलनी शुरू: महाजेंको की खरीद पर सवाल, 100 करोड़ के लेन-देन की जांच के आदेश

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़/रायपुर, 29 मई 2026।
छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र रायगढ़ में जमीन से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने प्रशासनिक और औद्योगिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। महाराष्ट्र सरकार की बिजली उत्पादन कंपनी महाजेंको द्वारा खरीदी गई जमीन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। प्रारंभिक शिकायतों में करीब 100 करोड़ रुपये के लेन-देन और लगभग 500 एकड़ भूमि की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार के ऊर्जा एवं उद्योग विभाग ने कंपनी स्तर पर जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद इस पूरे प्रकरण पर नजर और सख्त हो गई है।

कोल ब्लॉक और ‘क्षतिपूर्ति भूमि’ का गणित
महाजेंको को तमनार क्षेत्र के गारे-पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक का आवंटन मिला है, जहां खनन परियोजना के साथ पर्यावरणीय शर्तों के तहत क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होती है। इसी प्रक्रिया के तहत कंपनी द्वारा 500 एकड़ भूमि खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि, आरोप यह है कि यह भूमि वास्तविक रूप से वन क्षेत्र की श्रेणी में आती है और इसका स्पष्ट राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। सीमावर्ती इलाकों में स्थित ऐसे कई गांवों को ‘मसाहती’ श्रेणी में रखा गया है, जहां दशकों से आदिवासी समुदाय निवास करते आए हैं, लेकिन भूमि का विधिवत रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया है।

फर्जी रजिस्ट्री और ‘सिंडिकेट’ की चर्चा
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भूमाफिया, बिचौलियों और कुछ राजस्व एवं वन अधिकारियों की कथित मिलीभगत से इस भूमि की रजिस्ट्री कराई गई। आरोपों के अनुसार, जमीन के भौतिक सत्यापन तक के दस्तावेज तैयार किए गए, जबकि भूमि की प्रकृति और स्वामित्व को लेकर गंभीर विसंगतियां बताई जा रही हैं।

इस पूरे प्रकरण में स्थानीय स्तर पर ‘सिंडिकेट’ की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है और संबंधित अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट होना बाकी है।

विज्ञापन से लेकर खरीद तक—प्रक्रिया पर उठे सवाल
सूत्र बताते हैं कि जमीन की उपलब्धता के लिए विज्ञापन प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन जिन माध्यमों में विज्ञापन प्रकाशित हुए, उनकी पहुंच और विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह भी आरोप है कि जिन एजेंसियों ने रुचि दिखाई, वे परोक्ष रूप से एक ही नेटवर्क से जुड़ी हुई थीं।

कैंपा फंड पर भी निगाहें
मामले के साथ ही ‘कैंपा’ (Compensatory Afforestation Fund) से जुड़े खर्चों को लेकर भी प्रश्न उठने लगे हैं। नियमों के अनुसार, परियोजना के कारण प्रभावित वन क्षेत्र की भरपाई के लिए कंपनी से एक निश्चित राशि ली जाती है, जिसका उपयोग वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण कार्यों में किया जाता है। ऐसे में इस फंड के उपयोग और निगरानी की पारदर्शिता भी चर्चा के केंद्र में आ गई है।

जांच से साफ होगी तस्वीर
फिलहाल, पूरा मामला जांच के दायरे में है और विभिन्न स्तरों पर तथ्य जुटाए जा रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के दस्तावेजों में कोई त्रुटि थी या फिर सुनियोजित तरीके से अनियमितताएं की गईं।


रायगढ़ जैसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह के आरोप न केवल निवेश की विश्वसनीयता पर असर डालते हैं, बल्कि ‘जल, जंगल और जमीन’ से जुड़े स्थानीय समुदायों के अधिकारों को भी सीधे प्रभावित करते हैं। अब निगाहें जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं, जो इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेंगे।

Now U can Download Amar khabar from google play store also.

Amar Chouhan

AmarKhabar.com एक हिन्दी न्यूज़ पोर्टल है, इस पोर्टल पर राजनैतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, देश विदेश, एवं लोकल खबरों को प्रकाशित किया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित आस पास की खबरों को पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर प्रतिदिन विजिट करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button