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सीतापुर में सत्ता बनाम प्रशासन: नायब तहसीलदार से मारपीट के मामले में विधायक समेत कई पर FIR, दोनों पक्षों ने लगाए गंभीर आरोप

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

सीतापुर/सरगुजा।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र में सत्ता और प्रशासन के बीच टकराव का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक ओर सत्तारूढ़ दल के विधायक पर नायब तहसीलदार से सार्वजनिक रूप से मारपीट करने का आरोप है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारी पर भी अभद्र व्यवहार और दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

घटना राजापुर क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि क्षेत्रीय विधायक रामकुमार टोप्पो अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और विवाद के दौरान उनके साथ मारपीट की गई। शिकायत के अनुसार, यह घटना सार्वजनिक स्थल—राजपुर चौराहे—पर हुई, जहां उनके कपड़े फाड़े गए और उन्हें जमीन पर गिरा दिया गया।

पुलिस ने इस मामले में विधायक रामकुमार टोप्पो सहित यूसुफ, नाजिम रजा, पंकज गुप्ता और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं—221, 221(1), 132 और 191(2)—के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें शासकीय कार्य में बाधा, हमला और दंगा जैसी प्रकृति के अपराध शामिल हैं।

हालांकि, मामला यहीं एकतरफा नहीं है। विधायक की ओर से जुड़ी एक महिला—सीमा धनकी—ने भी नायब तहसीलदार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। महिला का आरोप है कि अधिकारी ने उनके साथ जातिगत अपमान, अश्लील इशारे और धक्का-मुक्की करते हुए उन्हें जबरन कार्यालय से बाहर निकाला। इस शिकायत पर पुलिस ने नायब तहसीलदार के खिलाफ भी बीएनएस की धारा 296, 351(2) और 79 के तहत जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के बीच संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां प्रशासनिक अधिकारी सुरक्षा और सम्मान की मांग कर रहे हैं, वहीं जनप्रतिनिधियों के समर्थक इसे जनभावनाओं की प्रतिक्रिया बता रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, विवाद की जड़ एक सामान्य बहस से शुरू हुई, जो धीरे-धीरे तीखी नोकझोंक और फिर कथित हिंसा में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो घटनास्थल पर स्थिति कुछ समय के लिए पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई थी।

सरगुजा पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है और निष्पक्ष जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लगातार बहस जारी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संवाद की कमी इस तरह के टकराव को जन्म दे रही है।

फिलहाल, मामला जांच के अधीन है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कानून का संतुलन किस प्रकार कायम रखा जाता है—खासतौर पर तब, जब एक तरफ सत्ता का प्रतिनिधित्व हो और दूसरी तरफ प्रशासनिक व्यवस्था।

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Amar Chouhan

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