प्रशासन पर हमलों से उबल रहा तंत्र: राजपुर घटना के बाद कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ सख्त, प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़।
छत्तीसगढ़ में राजस्व अधिकारियों पर बढ़ते हमलों और कथित अभद्र व्यवहार की घटनाओं ने प्रशासनिक तंत्र के भीतर गहरी बेचैनी पैदा कर दी है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के राजपुर तहसील में नायब तहसीलदार के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ खुलकर विरोध में आ गया है और उसने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ त्वरित, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
संघ ने अपने आधिकारिक वक्तव्य और जारी अपील में कहा है कि राजस्व अधिकारी और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट न केवल शासन की नीतियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाते हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में ड्यूटी के दौरान उन पर हमला या अभद्र व्यवहार किसी एक अधिकारी के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे और लोकतांत्रिक प्रणाली पर सीधा प्रहार है।
राजपुर की घटना ने भड़काया असंतोष
27 मई 2026 को राजपुर तहसील कार्यालय में पदस्थ नायब तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट तुषार मानिकपुरी के साथ कथित रूप से गाली-गलौज, धमकी और मारपीट की घटना सामने आई। इस प्रकरण ने प्रदेशभर के प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। कई जिलों में अधिकारियों ने अनौपचारिक बैठकों के जरिए स्थिति पर चिंता जताई है।
संघ का कहना है कि सरकारी कामकाज के दौरान अधिकारियों को डराने-धमकाने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है, जो न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि शासन व्यवस्था को कमजोर करने की ओर संकेत करती है। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार अधिकारियों के खिलाफ दबाव बनाने के उद्देश्य से झूठे प्रकरण भी दर्ज कराए जाते हैं, जिससे उनका मनोबल प्रभावित होता है।
सुरक्षा और सम्मान को लेकर उठी ठोस मांगें
संघ ने राज्य सरकार और प्रशासन के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें घटना में शामिल आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, कठोर कानूनी कार्रवाई, राजस्व कार्यालयों और तहसील न्यायालयों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, न्यायालयीन कार्य में अनावश्यक हस्तक्षेप पर रोक और नए तहसीलों में आवश्यक संसाधनों एवं स्टाफ की उपलब्धता शामिल है।
इसके साथ ही संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण या दबावपूर्वक दर्ज कराए जाने वाले मामलों पर भी सख्ती से रोक लगनी चाहिए, ताकि प्रशासनिक कार्य निष्पक्ष और निर्भीक रूप से जारी रह सके।
“सेवा के बदले सुरक्षा चाहिए”
संघ के पदाधिकारियों ने अपने संदेश में कहा कि राजस्व अधिकारी दिन-रात जनता की सेवा में लगे रहते हैं और शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और गरिमा की रक्षा करना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
आगे क्या?
संघ ने संकेत दिया है कि यदि आने वाले दिनों में इस मामले में ठोस और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती है, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत की जाएगी, जिसकी रूपरेखा जल्द घोषित की जा सकती है। इससे प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल, सभी की निगाहें सरकार और पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या यह मामला केवल एक एफआईआर तक सीमित रहेगा या फिर इसे प्रशासनिक सुरक्षा के व्यापक मुद्दे के रूप में लिया जाएगा।
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