“NTPC लारा के साए में धूल, अव्यवस्था और सवाल: विकास की कीमत क्या श्रमिकों का स्वास्थ्य है?” (देखें कैंपस के अंदर साइट)

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)।
जिले के लारा स्थित NTPC Limited परियोजना क्षेत्र में काम कर रहे श्रमिकों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अंदरूनी इलाकों—विशेषकर स्टेट से सिवल एरिया तक—लगातार दौड़ते भारी वाहनों (हाईवा) से उठने वाली धूल और प्रदूषण ने हालात चिंताजनक बना दिए हैं। स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दिनभर उड़ती धूल के बीच काम करने को मजबूर मजदूरों के लिए बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बताया जा रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक, कार्यस्थल पर पीने के साफ पानी, शौचालय, पार्किंग, रेस्ट रूम और भोजन के लिए समुचित स्थान जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं या तो नदारद हैं या बेहद अपर्याप्त हैं। ऐसे में श्रमिकों को सड़क किनारे या असुरक्षित स्थानों पर बैठकर भोजन करना पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य और गरिमा दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
https://youtube.com/shorts/Or_CPaaXtwI?si=8w0YKlMVAyqE4hoj
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस परियोजना को देश के विकास का प्रतीक बताया जाता है, वहां जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है। “भारत रत्न” जैसे बड़े नाम से जुड़ी छवि के विपरीत, श्रमिकों की स्थिति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप यह भी हैं कि कार्यस्थल पर निगरानी और जवाबदेही का अभाव है, जिसके चलते ठेका प्रणाली के तहत काम करने वाले मजदूरों का शोषण थमने का नाम नहीं ले रहा।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और संबंधित प्रबंधन या प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यदि ये दावे सही हैं, तो यह न केवल श्रम कानूनों के उल्लंघन का मामला बनता है, बल्कि औद्योगिक परियोजनाओं में मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी का भी संकेत देता है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या विकास परियोजनाओं की सफलता केवल उत्पादन और आंकड़ों से तय होगी, या उसमें काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाएगा?
(समाचार सहयोगी : पद्मनाभ प्रधान)
Now U can Download Amar khabar from google play store also.