जनआक्रोश के आगे टली पेलमा जनसुनवाई: तमनार में ग्रामीणों ने ‘प्रलोभन’ के आरोपों के बीच उठाई जमीन-अधिकार की आवाज (देखें वीडियो)

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)।
रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित पेल्मा ओपनकास्ट कोल खदान परियोजना को लेकर 19 मई 2026 को होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई ऐन मौके पर स्थगित कर दी गई। यह निर्णय उस समय लिया गया, जब प्रभावित गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने एक दिन पहले कलेक्ट्रेट पहुंचकर तीखा विरोध दर्ज कराया और प्रशासन को अपनी मांगों से अवगत कराया।
घटनाक्रम के केंद्र में ग्राम पेल्मा, उरबा और लालपुर सहित आसपास के वे गांव हैं, जिनकी जमीन प्रस्तावित खदान परियोजना के दायरे में बताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जनसुनवाई से पहले उन्हें विभिन्न सामग्रियां बांटी गईं, जिन्हें वे “प्रलोभन” के तौर पर देख रहे हैं। विरोध स्वरूप कुछ ग्रामीण इन सामग्रियों को कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर लाकर सार्वजनिक रूप से वापस करते नजर आए।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। कई ग्रामीणों ने खुले तौर पर कहा कि वे अपनी जमीन और आजीविका के सवाल पर किसी भी तरह का समझौता नहीं चाहते। स्थानीय आजीविका—महुआ, तेंदूपत्ता और कृषि—पर निर्भरता का हवाला देते हुए उन्होंने आशंका जताई कि जमीन अधिग्रहण के बाद उनके सामने जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो सकता है।
18 मई को आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सभी प्रभावित गांवों के लिए समान मुआवजा तय करने और पुनर्वास नीति के तहत स्थायी रोजगार सुनिश्चित करने की मांग शामिल थी। ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक इन बिंदुओं पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे जनसुनवाई प्रक्रिया का विरोध जारी रखेंगे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से जनसुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। इसके बाद मंडल ने 18 मई को जारी आदेश में 19 मई को प्रस्तावित लोक सुनवाई को आगामी आदेश तक टालने की पुष्टि की।
यह घटनाक्रम एक बार फिर विकास परियोजनाओं और स्थानीय समुदायों के बीच संतुलन के प्रश्न को सामने लाता है। एक ओर औद्योगिक परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास का दावा करती हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित समुदाय अपने अधिकारों, पारंपरिक आजीविका और सामाजिक सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं।
फिलहाल, जनसुनवाई स्थगित होने के बाद मामला नए चरण में प्रवेश कर चुका है। प्रशासन, कंपनी और ग्रामीणों के बीच आगे की बातचीत किस दिशा में जाती है, इस पर क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं।
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