प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद पेलमा कोल परियोजना की जनसुनवाई स्थगित, अब अगली तारीख पर टिकी निगाहें

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़।
तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित पेलमा ओपनकास्ट कोल माइंस परियोजना एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। 19 मई 2026 को ग्राम पेलमा में प्रस्तावित जनसुनवाई को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। यह निर्णय छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा जारी आदेश के तहत लिया गया, जो जिला प्रशासन के अनुरोध के बाद सामने आया है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रायगढ़ द्वारा 18 मई 2026 को भेजे गए पत्र के आधार पर यह कदम उठाया गया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जनसुनवाई को “अगली सूचना तक” टाल दिया गया है, यानी फिलहाल नई तारीख घोषित नहीं की गई है।
पेलमा ओपनकास्ट कोल माइंस परियोजना साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) द्वारा प्रस्तावित है। लगभग 2077.934 हेक्टेयर में फैली इस परियोजना की वार्षिक उत्पादन क्षमता 15 मिलियन टन (MTPA) निर्धारित की गई है। परियोजना का दायरा केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पेलमा, उरबा, मदनपुर, ललपुर, हिंजर, जरहीडीह, सक्ता, मिलुपारा और खर्रा जैसे कई गांव इसके प्रभाव क्षेत्र में आते हैं।
जनसुनवाई किसी भी बड़ी औद्योगिक परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है, जहां प्रभावित क्षेत्रों के लोग अपनी आपत्तियां, सुझाव और चिंताएं दर्ज कराते हैं। ऐसे में इस स्थगन ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों के बीच अब यह चर्चा तेज है कि आखिर किन परिस्थितियों में यह फैसला लिया गया और आगे प्रशासन का रुख क्या होगा।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि क्षेत्र में पहले से ही इस परियोजना को लेकर संवेदनशील माहौल बना हुआ था। जनसुनवाई की तारीख तय होने के बाद विभिन्न पक्षों द्वारा अपनी-अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी गई थीं। ऐसे समय में अचानक स्थगन का आदेश आने से उत्सुकता के साथ-साथ अनिश्चितता भी बढ़ी है।
प्रशासनिक स्तर पर हालांकि इसे एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, जहां व्यवस्थागत और विधिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाता है। वहीं, पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर जागरूक नागरिकों की नजर अब आगामी आदेश पर टिक गई है।
स्पष्ट है कि पेलमा परियोजना केवल एक औद्योगिक पहल नहीं, बल्कि स्थानीय जनजीवन, पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन का एक अहम सवाल बन चुकी है। अब देखना होगा कि प्रशासन नई तारीख कब घोषित करता है और जनसुनवाई के मंच पर किन-किन मुद्दों की गूंज सुनाई देती है।
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