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रायगढ़ में प्रदूषण पर सख्ती: 25 उद्योगों पर 79 लाख का जुर्माना, मॉनिटरिंग और नियमों पर ‘जीरो टॉलरेंस’

रायपुर/रायगढ़, 12–13 मई 2026।
औद्योगिक गतिविधियों के लिए पहचाने जाने वाले रायगढ़ जिले में पर्यावरणीय मानकों के पालन को लेकर अब सख्ती साफ दिखाई देने लगी है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर इस वर्ष व्यापक कार्रवाई करते हुए अब तक 25 उद्योगों पर कुल 79 लाख रुपये से अधिक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि अधिरोपित की है।

मंडल के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि उद्योगों को जवाबदेह बनाने और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में ठोस सुधार सुनिश्चित करने की पहल है।



AQI पर स्थिति: ‘संतोषजनक’ से ‘मध्यम’ के बीच स्थिर

मंडल का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर रायगढ़ की वायु गुणवत्ता फिलहाल ‘संतोषजनक’ से ‘मध्यम’ श्रेणी के बीच बनी हुई है। हाल के दिनों में प्रदूषण के अत्यधिक बढ़ने की आशंकाओं को मंडल ने तथ्यों से परे बताया है।

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि औद्योगिक दबाव वाले इस क्षेत्र में सतत निगरानी और सख्ती बेहद जरूरी है, ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।

वास्तविक Aqi आप स्वयं भी चेक करके देख सकते हैं।


आधुनिक तकनीक से निगरानी का नेटवर्क

जिले में वायु गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए चार सतत परिवेशीय वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र (CAAQMS) स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र खनन और औद्योगिक प्रभाव वाले क्षेत्रों—कुंजेमुरा, मिलुपारा (तमनार), छाल (धरमजयगढ़) और पूंजीपथरा—में संचालित हैं।

इसके अलावा नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत रायगढ़ शहर और ओपी जिंदल औद्योगिक क्षेत्र में मैन्युअल मॉनिटरिंग भी नियमित रूप से की जा रही है। यह दोहरी व्यवस्था डेटा की सटीकता और निगरानी की निरंतरता सुनिश्चित करती है।


नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई

जनवरी से मई 2026 के बीच हुई कार्रवाई पर नजर डालें तो:

8 उद्योगों पर प्रदूषण मानकों के उल्लंघन के लिए 3.22 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया

17 उद्योगों पर फ्लाई ऐश प्रबंधन और परिवहन नियमों के उल्लंघन के लिए 76.20 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति तय की गई


इस तरह कुल 25 उद्योगों के खिलाफ करीब 79 लाख रुपये की कार्रवाई दर्ज की गई है।

मंडल ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी उद्योग को बख्शा नहीं जाएगा।


फ्लाई ऐश पर सख्त SOP और डिजिटल ट्रैकिंग

सड़क पर उड़ने वाली राखड़ और धूल की समस्या को नियंत्रित करने के लिए मंडल ने विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है। इसके तहत:

परिवहन के दौरान डस्ट कंट्रोल उपाय अनिवार्य किए गए हैं

फ्लाई ऐश के उठाव से लेकर अंतिम निपटान तक की प्रक्रिया IWMMS पोर्टल के माध्यम से ट्रैक की जा रही है


यह डिजिटल सिस्टम पारदर्शिता बढ़ाने और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


लगातार निरीक्षण, आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई

मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि उद्योगों का नियमित निरीक्षण जारी है और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई होती रहेगी।

अधिकारियों का कहना है कि “उद्योगों का विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं।”


रायगढ़ जैसे औद्योगिक जिले में प्रदूषण नियंत्रण हमेशा एक चुनौती रहा है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण मंडल की यह सख्ती न केवल नियमों के पालन को मजबूती देगी, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संतुलन को भी सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

गौरतलब है की छत्तीसगढ़ के पर्यावरण मंत्री स्वयं रायगढ़ जिले से ही हैं।

Amar Chouhan

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