सट्टे से हवाला तक: रायगढ़ में करोड़ों के ‘मनी ट्रेल’ का खुलासा, पुलिस ने तोड़ा संगठित आर्थिक अपराध का नेटवर्क”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 13 मई।
आईपीएल सट्टेबाजी के बहाने खड़े किए गए एक संगठित आर्थिक साम्राज्य का पर्दाफाश करते हुए रायगढ़ पुलिस ने जिले में अवैध वित्तीय गतिविधियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि ऑनलाइन सट्टा अब महज खेल का अवैध दांव नहीं, बल्कि ब्लैक मनी, हवाला और संगठित अपराध की जटिल श्रृंखला में बदल चुका है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर सेल, कोतवाली और घरघोड़ा पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल ट्रेल और वित्तीय विश्लेषण के आधार पर इस नेटवर्क की परतें उजागर कीं। पुलिस ने तीन प्रमुख आरोपियों—करन चौधरी, पुष्कर अग्रवाल और सुनील अग्रवाल—को गिरफ्तार करते हुए उनके पास से 1 करोड़ 2 लाख 81 हजार 300 रुपये नकद, नोट गिनने की मशीन, चार मोबाइल फोन सहित कुल 1 करोड़ 3 लाख 86 हजार 300 रुपये की संपत्ति जब्त की है।

सट्टा नहीं, संगठित ‘मनी मशीन’
जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क केवल मैचों पर सट्टा लगाने तक सीमित नहीं था। यह एक संगठित आर्थिक ढांचा था, जिसमें करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था।
मुख्य आरोपी करन चौधरी कथित रूप से रायगढ़, सक्ती, रायपुर, बिलासपुर से लेकर दिल्ली तक फैले नेटवर्क के जरिए ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहा था। सट्टे से होने वाली कमाई को सीधे रखने के बजाय विभिन्न व्यवसायिक माध्यमों—जैसे पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर और अन्य चैनलों—के जरिए ‘कैश डंप’ किया जाता था, जिससे जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।
हवाला के जरिए ‘काली कमाई’ का वैधीकरण
पुलिस जांच में कृष्णा प्राइड टावर स्थित फ्लैट इस नेटवर्क की अहम कड़ी बनकर सामने आया। यहां रहने वाले पुष्कर अग्रवाल और उनके पिता सुनील अग्रवाल कथित रूप से इस अवैध कमाई को हवाला के माध्यम से सफेद करने में लगे थे।
छापेमारी के दौरान सुनील अग्रवाल के पास से 50 लाख रुपये नकद और नोट गिनने की मशीन, जबकि पुष्कर अग्रवाल के पास से 52 लाख 60 हजार रुपये बरामद हुए। इसके साथ मिले मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड ने मनी ट्रेल को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डिजिटल चालाकी, लेकिन तकनीकी पकड़ भारी
आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए निजी बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का सीमित उपयोग किया। इसके बजाय कर्मचारियों और परिचितों के खातों तथा नंबरों का इस्तेमाल कर लेनदेन किया जाता था। बावजूद इसके, कॉल डिटेल, चैट रिकॉर्ड और यूपीआई ट्रांजेक्शन के विश्लेषण ने पूरे नेटवर्क को उजागर कर दिया।
पहले की कार्रवाई से खुली कड़ियां
इस पूरे मामले की नींव 26 अप्रैल को रखी गई थी, जब पुलिस ने रायगढ़ और घरघोड़ा में एक साथ दबिश देकर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उस दौरान मिले मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों ने ही इस बड़े नेटवर्क की ओर संकेत दिया था। पूछताछ में करन चौधरी और उसके सहयोगियों का नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।
फरार कड़ी की तलाश जारी
जसमीत सिंह बग्गा उर्फ ‘गुड्डा सरदार’ इस सिंडिकेट की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से इस नेटवर्क के और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
आपराधिक पृष्ठभूमि और कड़ी धाराएं
मुख्य आरोपी करन चौधरी के खिलाफ पहले से ही जुआ-सट्टा, मारपीट, रंगदारी, अपहरण जैसे गंभीर मामलों के रिकॉर्ड दर्ज हैं। लगातार आपराधिक गतिविधियों और संगठित नेटवर्क के प्रमाण मिलने के बाद पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 (संगठित अपराध) भी जोड़ी है। सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।
पुलिस की नजर अब नेटवर्क के बाकी सिरों पर
पूरे ऑपरेशन की निगरानी स्वयं एसएसपी स्तर पर की जा रही है। एडिशनल एसपी, सीएसपी और साइबर टीम के नेतृत्व में अन्य जिलों के साथ समन्वय बनाकर नेटवर्क के बाकी हिस्सों की तलाश की जा रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
कड़ा संदेश
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट कहा है कि जिले में सट्टा, हवाला और ब्लैक मनी से जुड़े किसी भी नेटवर्क को बख्शा नहीं जाएगा। आर्थिक अपराधों के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
इस कार्रवाई ने न केवल एक बड़े सट्टा नेटवर्क को ध्वस्त किया है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि डिजिटल युग में पनप रहे आर्थिक अपराधों पर अब पुलिस की नजर पहले से कहीं अधिक पैनी हो चुकी है।
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