रायगढ़ में हाथियों का बढ़ता दबाव: रात ढलते ही खेतों पर धावा, किसानों की फसलें तबाह

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़। जिले में जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी अब ग्रामीण इलाकों के लिए गंभीर चिंता का कारण बनती जा रही है। वन विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जिले में 130 से अधिक हाथियों का मूवमेंट दर्ज किया गया है, जिनमें रायगढ़ वन मंडल में 38 और धर्मजयगढ़ वन मंडल में 94 हाथियों की सक्रियता बताई जा रही है।
रविवार की रात यह संकट और गहरा गया, जब धर्मजयगढ़ वन मंडल के विभिन्न रेंजों में हाथियों के झुंड खेतों तक पहुंच गए। अलग-अलग गांवों में करीब 15 किसानों की धान और मक्का की फसल को हाथियों ने या तो खाकर नष्ट कर दिया या पैरों तले रौंद दिया।
जानकारी के अनुसार धर्मजयगढ़ रेंज के आमगांव में पांच किसानों की धान की फसल बर्बाद हुई। वहीं दर्रीडीह और ओंगना में तीन किसानों को नुकसान झेलना पड़ा। क्रोंधा में एक किसान की फसल हाथियों के हमले की चपेट में आई। छाल रेंज के लामीखार में मक्का की फसल को नुकसान पहुंचा, जबकि हाटी तेंदुमुड़ी में तीन किसानों की धान की फसल प्रभावित हुई। बोरो रेंज के कुमा गांव में भी दो किसानों की फसल हाथियों के झुंड ने नष्ट कर दी।
ग्रामीणों के मुताबिक, रात होते ही हाथियों का दल खेतों की ओर बढ़ा। सूचना मिलने पर ग्रामीणों ने वन अमले के साथ मिलकर हाथियों को खदेड़ने की कोशिश की, लेकिन झुंड देर तक खेतों में ही डटा रहा। हाथियों की संख्या अधिक होने के कारण लोगों को दूरी बनाकर ही शोर-शराबा कर उन्हें हटाने का प्रयास करना पड़ा। अंततः सुबह होने से पहले हाथी वापस जंगल की ओर लौट गए।
सोमवार सुबह वन विभाग की टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा कर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रारंभिक तौर पर नुकसान काफी अधिक बताया जा रहा है, हालांकि आधिकारिक आंकड़े सर्वे के बाद ही सामने आएंगे।
स्थानीय किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ते हाथियों के मूवमेंट से उनकी फसल और जान-माल दोनों खतरे में हैं। कई गांवों में रात के समय पहरा देना मजबूरी बन गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से स्थायी समाधान और त्वरित मुआवजा देने की मांग की है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही ग्रामीणों को सतर्क रहने और समूह में ही खेतों की निगरानी करने की सलाह दी गई है।
जिले में हाथियों की बढ़ती आवाजाही ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या को सामने ला दिया है, जिसका समाधान अब केवल अस्थायी उपायों से संभव नहीं दिख रहा।
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