“15 बनाम 75 से ‘तानाशाही’ तक: लैलूंगा में बैठक विवाद ने पकड़ा उग्र रूप, जनपद गेट पर सरपंचों का कब्जा”


Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
लैलूंगा। जनपद पंचायत लैलूंगा इन दिनों एक साधारण प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि उबलते असंतोष का केंद्र बन चुकी है। एक ओर 29 अप्रैल को प्रस्तावित समीक्षा बैठक को लेकर उठा विवाद है, तो दूसरी ओर सीईओ प्रीति नायडू के कार्यशैली पर गंभीर आरोप—इन दोनों ने मिलकर हालात को सीधा टकराव की दिशा में धकेल दिया है।
सोमवार को स्थिति उस वक्त और बिगड़ गई, जब सरपंच संघ ने जनपद पंचायत के मुख्य द्वार पर धरना शुरू कर दिया। नारेबाजी, विरोध और चेतावनियों के बीच यह साफ दिखा कि मामला अब सिर्फ बैठक के स्थान तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि प्रशासनिक भरोसे के संकट में बदल चुका है।
बैठक का विवाद: 15 पंचायत बनाम 75 का सवाल
पूरा विवाद उस पत्र से शुरू हुआ, जिसमें 29 अप्रैल को हाईस्कूल कोडासिंया में 15 ग्राम पंचायतों के सरपंचों और सचिवों की समीक्षा बैठक तय की गई। जनपद क्षेत्र की कुल 75 पंचायतों में से सिर्फ चुनिंदा 15 को बुलाने के फैसले ने बाकी प्रतिनिधियों में असंतोष भड़का दिया।
धरने पर बैठे सरपंचों का कहना है कि यह न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों के सामूहिक अधिकार और सम्मान के भी खिलाफ है। उनका साफ तर्क है—जब पूरा जनपद एक इकाई है, तो समीक्षा भी एक मंच पर ही होनी चाहिए।
“तुगलकी फरमान या तानाशाही?”—सीईओ पर सीधे आरोप
इसी बीच आंदोलन को और धार तब मिली, जब सरपंच संघ ने सीईओ प्रीति नायडू की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठाए। आरोप है कि प्रशासनिक सख्ती अब मनमानी में बदलती जा रही है।
सरपंचों और सचिवों का दावा है कि बिना पूर्व सूचना देर शाम या रात में पंचायतों में पहुंचकर जांच करना, ताले तुड़वाना और तत्काल कार्रवाई की धमकी देना आम होता जा रहा है। इससे पंचायत स्तर पर भय और असहजता का माहौल बन गया है।
एक पंचायत सचिव ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा,
“काम करने से ज्यादा अब खुद को बचाने की चिंता रहती है। हर वक्त दबाव बना रहता है।”
“जांच या जुल्म?”—सवालों के घेरे में प्रशासनिक तरीका
धरना स्थल पर यह सवाल बार-बार गूंजता रहा—क्या यह सख्ती व्यवस्था सुधारने के लिए है या फिर नियंत्रण स्थापित करने का तरीका?
सरपंच संघ का आरोप है कि छोटी-छोटी बातों पर नोटिस, सार्वजनिक फटकार और लगातार दबाव ने पंचायत अमले का मनोबल तोड़ दिया है।
सरपंच संघ का अल्टीमेटम और आंदोलन की चेतावनी
सरपंच संघ ने अब तीन स्पष्ट मांगों के साथ मोर्चा खोल दिया है—
हाईस्कूल कोडासिंया में प्रस्तावित बैठक तत्काल रद्द हो
सभी 75 ग्राम पंचायतों की संयुक्त बैठक जनपद पंचायत कार्यालय में हो
भविष्य में इस तरह के “चयनात्मक” फैसलों पर रोक लगे
साथ ही चेतावनी भी साफ है—अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसका असर पंचायत स्तर के कामकाज पर भी पड़ सकता है।
प्रशासन के लिए बढ़ती चुनौती
यह पूरा विवाद अब सिर्फ एक जनपद तक सीमित नहीं रह गया है। जिस तरह से “तानाशाही”, “तुगलकी फरमान” जैसे शब्द खुलेआम इस्तेमाल हो रहे हैं, उसने प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिक गई हैं। क्या वह इस टकराव को संवाद से सुलझाएगा, या फिर हालात और बिगड़ेंगे—यह आने वाले समय में तय होगा।
फिलहाल, लैलूंगा में जनपद पंचायत का गेट सिर्फ एक सरकारी प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि सत्ता और सरपंचों के बीच गहराते अविश्वास का प्रतीक बन चुका है।
अन्य अधिक खबरों के लिए क्लिक करें https://amarkhabar.com/