महंगाई भत्ता सहित 6 सूत्रीय मांगों पर कर्मचारियों का दबाव बढ़ा, तहसील मुख्यालयों में सौंपे गए ज्ञापन

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
घरघोड़ा, रायगढ़।
छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर संगठित स्वर में आवाज बुलंद की है। बुधवार को प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत घरघोड़ा सहित विभिन्न जिला एवं विकासखंड मुख्यालयों में कर्मचारियों ने एकत्र होकर राज्य सरकार के नाम ज्ञापन सौंपे। घरघोड़ा में यह ज्ञापन अनुभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री डी.पी. अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को प्रेषित किया गया।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के लगभग साढ़े चार लाख अधिकारी-कर्मचारी लंबे समय से महंगाई भत्ते में वृद्धि की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ज्ञापन में 1 जनवरी 2026 से 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता स्वीकृत करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच यह वृद्धि राहत देने के लिए आवश्यक है।
इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा विधानसभा के बजट सत्र में घोषित कैशलेस चिकित्सा सुविधा को लेकर भी कर्मचारियों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि घोषणा के कई माह बाद भी इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुए हैं, जिससे कर्मचारी वर्ग को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सेवानिवृत्ति संबंधी प्रावधानों में संशोधन की मांग भी ज्ञापन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। संघ ने केंद्रीय कर्मचारियों एवं मध्य प्रदेश के कर्मचारियों की तर्ज पर अवकाश नकदीकरण की सीमा 240 दिनों से बढ़ाकर 300 दिन करने की मांग रखी है।
इसके अलावा संविदा, दैनिक वेतनभोगी एवं अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। संघ का कहना है कि लंबे समय से कार्यरत इन कर्मचारियों को रिक्त पदों के विरुद्ध नियमित कर स्थायित्व प्रदान किया जाना चाहिए।
शिक्षक एलबी संवर्ग के संदर्भ में प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए सभी सेवा लाभ प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से सामने आई। वहीं अनुकंपा नियुक्ति के प्रावधानों में 10 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर सभी पात्र आश्रितों को नियुक्ति देने की मांग भी कर्मचारियों ने रखी है।
घरघोड़ा तहसील मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे। शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखते हुए कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लेगी।
हालांकि अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि आने वाले समय में यह मुद्दा व्यापक कर्मचारी आंदोलन का रूप भी ले सकता है।
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