ड्रोन सर्वे से खुलेगी मुआवजा खेल की परतें: धरमजयगढ़ में अवैध शेड पर प्रशासन सख्त, नोटिस जारी

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़/धरमजयगढ़, 25 जुलाई 2026।
कोयला खनन परियोजनाओं में मुआवजा हासिल करने के लिए अपनाए जा रहे संदिग्ध तरीकों पर अब प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। एसईसीएल की प्रस्तावित दुर्गापुर कोयला खदान के लिए चल रहे भू-अर्जन प्रक्रिया के बीच प्रभावित क्षेत्रों में अवैध शेड निर्माण का मामला सामने आने के बाद ड्रोन सर्वे दोबारा शुरू कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि ऐसे अवैध निर्माणों को मुआवजे के दायरे में नहीं लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, धरमजयगढ़ क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा मुआवजा पाने की नीयत से खेतों में अस्थायी शेड और संरचनाएं खड़ी कर दी गई हैं। एसईसीएल की आपत्ति के बाद राजस्व अमले ने मौके का निरीक्षण किया, जिसमें प्रारंभिक जांच में करीब सात मामलों में शेड निर्माण की पुष्टि हुई है। संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
2015 से लंबित प्रक्रिया, अब तेज हुआ सर्वे
दुर्गापुर कोल माइंस के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्ष 2015 में अधिसूचना प्रकाशन के साथ शुरू हुई थी। इस परियोजना के तहत करीब 1677 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है, जिसमें 1425 हेक्टेयर राजस्व भूमि और 252 हेक्टेयर राजस्व वन भूमि शामिल है। अधिग्रहण के दायरे में दुर्गापुर, शाहपुर, धरमजयगढ़, तराईमार, बायसी और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ड्रोन सर्वे पहले भी शुरू किया गया था, लेकिन स्थानीय स्तर पर विरोध के कारण इसे बीच में रोकना पड़ा। अब एक बार फिर प्रशासन ने सर्वे शुरू कर वास्तविक स्थिति का आकलन करना शुरू किया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कौन से निर्माण वास्तविक हैं और कौन से हाल ही में मुआवजे के उद्देश्य से किए गए हैं।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा पैटर्न
विशेषज्ञों का मानना है कि तमनार क्षेत्र में पहले इसी तरह के मामलों में कथित रूप से फर्जी दावों और अस्थायी निर्माण के जरिए मुआवजा लेने की कोशिशें सामने आ चुकी हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई न होने से यह प्रवृत्ति अन्य क्षेत्रों में भी फैलने लगी है। धरमजयगढ़ में भी उसी पैटर्न को दोहराए जाने की आशंका जताई जा रही है।
संभावित घोटाले के संकेत
राजस्व और खनन से जुड़े जानकारों के अनुसार, यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो यह मामला बड़े मुआवजा घोटाले का रूप ले सकता है। सरकारी जमीनों को निजी स्वामित्व दर्शाने और अस्थायी ढांचों के जरिए मुआवजा हासिल करने के प्रयासों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की यह कार्रवाई अहम मानी जा रही है।
प्रशासन का स्पष्ट रुख
अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को पहले ही चेतावनी दी है कि अवैध निर्माण करने वालों को किसी भी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया जाएगा। ड्रोन सर्वे और फील्ड जांच के जरिए वास्तविक पात्रों की पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया जारी है।
अब निगाहें आगे की प्रक्रिया पर
इस पूरी कवायद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि गारे पेलमा सेक्टर-2 सहित अन्य प्रस्तावित परियोजनाओं में सर्वे और मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया कब और किन मानकों पर आगे बढ़ेगी। क्षेत्र के प्रभावित ग्रामीणों और हितधारकों की नजर अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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