खामोशी तोड़ी, न्याय मिला: कोतरा रोड की घटना में अदालत का सख्त संदेश—नाबालिग से छेड़छाड़ पर 5 साल की सजा

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़।
एक साल पहले बंद दरवाज़े के भीतर घटी घटना ने आखिरकार अदालत के दरवाज़े पर न्याय का रास्ता पा लिया। कोतरा रोड थाना क्षेत्र में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 50 वर्षीय आरोपी को दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल पीड़िता के साहस की पुष्टि करता है, बल्कि समाज को यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि ऐसे अपराधों पर अब कानून की पकड़ और अधिक सख्त हो चुकी है।
घटना 16 अप्रैल 2025 की बताई जा रही है, जब 12वीं की पढ़ाई कर रही 17 वर्षीय किशोरी घर में अकेली थी। उसकी छोटी बहन गांव में आयोजित एक शादी समारोह में गई हुई थी। दोपहर के वक्त दरवाजे पर हुई दस्तक ने एक सामान्य दिन को भयावह मोड़ दे दिया। जैसे ही किशोरी ने दरवाजा खोला, सामने पड़ोस में रहने वाला कृपासिंधु सिदार खड़ा था। आरोप है कि उसने जबरन भीतर घुसकर युवती के साथ अभद्र हरकत करने की कोशिश की।
लेकिन हालात उस वक्त बदले, जब पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए विरोध किया और आरोपी को उसकी हरकत उजागर करने की चेतावनी दी। इस अप्रत्याशित प्रतिरोध से घबराकर आरोपी मौके से फरार हो गया। घटना के बाद पीड़िता ने कोतरा रोड थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना पक्ष मजबूती से रखा। विशेष लोक अभियोजक गोविंद नारायण दुबे की पैरवी के बाद अदालत ने आरोपी कृपासिंधु सिदार को विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिया। न्यायालय ने बीएनएस की धारा 331(3) के तहत तीन वर्ष, धारा 74 के तहत पांच वर्ष और पॉक्सो एक्ट के तहत भी पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही कुल सात हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। हालांकि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
यह फैसला उस सामाजिक सोच पर भी सवाल उठाता है, जहां अक्सर ऐसे मामलों में पीड़ित चुप रहने को मजबूर हो जाते हैं। इस प्रकरण में पीड़िता की हिम्मत और परिवार के सहयोग ने न्याय की राह आसान बनाई। अदालत का यह निर्णय न सिर्फ एक सजा है, बल्कि एक सख्त चेतावनी भी—कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कानून अब और भी कठोर हो चुका है।
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