जशपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की नई रफ्तार: 23 ‘संजीवनी 108’ एम्बुलेंस से बदलेगा आपातकालीन उपचार का परिदृश्य (वीडियो न्यूज़)

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
— सालिक साय की मौजूदगी में हरी झंडी, जिले को मिला जीवनरक्षक नेटवर्क का मजबूत आधार
जशपुरनगर, 01 अप्रैल।
आदिवासी अंचल जशपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लंबे समय से महसूस की जा रही कमी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम सामने आया है। प्रदेश सरकार की पहल पर जिले को 23 अत्याधुनिक ‘संजीवनी 108’ एम्बुलेंस मिलने के बाद अब आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था न केवल तेज होगी, बल्कि अधिक भरोसेमंद भी बन सकेगी।
इस महत्वपूर्ण मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय ने रणजीता स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में स्वयं उपस्थित रहकर एम्बुलेंसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उनके साथ नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, लेकिन पूरे आयोजन का केंद्र बिंदु सालिक साय ही रहे, जिनकी प्राथमिकता साफ तौर पर जनस्वास्थ्य को लेकर दिखी।



“समय पर इलाज ही जीवन बचाता है” — सालिक साय
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि,
“आपातकालीन स्थिति में हर मिनट की कीमत होती है। इन एम्बुलेंसों के माध्यम से अब मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा और यह व्यवस्था सीधे जीवन बचाने का काम करेगी।”
उनकी बातों में केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी जरूरतों की समझ झलक रही थी। खासकर दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह सेवा किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही।
ALS और BLS: सुविधा का संतुलित विस्तार
जिले को मिली 23 एम्बुलेंसों में
3 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS)
20 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) शामिल हैं।
ALS एम्बुलेंसों को सन्ना, जिला चिकित्सालय जशपुर और कुनकुरी जैसे प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात किया गया है, जहां गंभीर मरीजों को तत्काल उन्नत चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
वहीं BLS एम्बुलेंसों का जाल पूरे जिले में इस तरह फैलाया गया है कि लगभग हर बड़े ग्रामीण और शहरी केंद्र तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो सके।
अब एम्बुलेंस ही बनेगी ‘चलता-फिरता अस्पताल’
इन एम्बुलेंसों को केवल मरीज ढोने का साधन नहीं, बल्कि प्राथमिक इलाज का केंद्र बनाया गया है।
इनमें उपलब्ध सुविधाएं बताती हैं कि अब इलाज अस्पताल पहुंचने का इंतजार नहीं करेगा—
बीपी मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर
ईसीजी और ग्लूकोमीटर
ऑक्सीजन सपोर्ट, नेब्युलाइजर
पोर्टेबल वेंटिलेटर
डिफिब्रिलेटर, सिरिंज पंप
यानी सड़क पर ही जीवन बचाने की पूरी तैयारी।
दूरस्थ जशपुर के लिए क्यों अहम है यह पहल?
जशपुर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण जिले में, जहां कई गांव अब भी सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर हैं, वहां यह पहल सीधे तौर पर मृत्यु दर कम करने और आपातकालीन प्रतिक्रिया समय घटाने में मदद करेगी।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए इसे “जशपुर के लिए ऐतिहासिक निर्णय” बताया।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की साझा मौजूदगी
इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी—
डॉ. जी.एस. जात्रा, डॉ. वी.के. इंदवार, डॉ. अरविंद रात्रे सहित कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
लेकिन पूरे आयोजन में जो बात सबसे अलग दिखी, वह थी स्थानीय नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी, खासकर सालिक साय की, जिन्होंने इसे केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जनहित का मिशन बनाकर प्रस्तुत किया।
जशपुर में 23 नई एम्बुलेंसों का जुड़ना केवल संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह उस सोच का विस्तार है जिसमें स्वास्थ्य सेवा को अधिकार के रूप में देखा जा रहा है।
अगर इन सेवाओं का संचालन उतनी ही प्रतिबद्धता से होता रहा, जितनी प्रतिबद्धता आज मंच पर दिखाई दी, तो आने वाले समय में जशपुर की पहचान केवल एक आदिवासी जिला नहीं, बल्कि सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था वाले मॉडल जिले के रूप में भी हो सकती है।