RTI में सामने आए संदिग्ध बिल-वाउचर, तुरंगा पंचायत में ‘पृथक्करण शेड’ निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़। जनपद पंचायत पुसौर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत तुरंगा में विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2024-25 में प्रस्तावित पृथक्करण शेड निर्माण कार्य अब कथित अनियमितताओं और संदिग्ध दस्तावेजों के कारण चर्चा के केंद्र में आ गया है।
गांव के ही सामाजिक कार्यकर्ता पद्मनाभ प्रधान ने मीडिया के सामने दावा किया है कि इस निर्माण कार्य के लिए लगभग 3.70 लाख रुपए की राशि स्वीकृत हुई थी, जिसे पंचायत सचिव द्वारा आहरित भी कर लिया गया। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। प्रधान का आरोप है कि मौके पर किए गए कार्य में मुश्किल से एक से डेढ़ लाख रुपए ही खर्च किए गए हैं, जबकि बाकी राशि के उपयोग पर संदेह बना हुआ है।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब सामाजिक कार्यकर्ता ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत संबंधित दस्तावेज प्राप्त किए। इन दस्तावेजों में प्रस्तुत बिल और वाउचर को लेकर गंभीर शंकाएं जताई जा रही हैं। प्रधान का कहना है कि जिन दुकानों के नाम पर निर्माण सामग्री—सीमेंट, सरिया, रेत और गिट्टी—की खरीदी दर्शाई गई है, वैसी कोई दुकान क्षेत्र में अस्तित्व में ही नहीं है। साथ ही, प्रस्तुत बिलों में जीएसटी से संबंधित वैधता के भी कोई प्रमाण नहीं मिले हैं, जिससे उनकी प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभुति प्रधान/पिता – सुभाष प्रधान, उदित कुमार प्रधान/पिता – राजेश प्रधान, इन दोनों ने पंचायत को बिल बना कर दिया है।


इन आरोपों के आधार पर पद्मनाम प्रधान ने 24 मार्च 2026 को जनपद पंचायत पुसौर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को आवेदन सौंपते हुए पूरे मामले की भौतिक सत्यापन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दस्तावेजों और वास्तविक कार्य का मिलान किया जाए, तो कथित गड़बड़ी स्पष्ट रूप से सामने आ सकती है।
गौरतलब है कि पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ही सूचना का अधिकार अधिनियम को एक मजबूत माध्यम माना जाता है। ऐसे में तुरंगा पंचायत का यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।

अब सबकी निगाहें जनपद पंचायत प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं।
News associate Padmanabh pradhan