“68 हजार का जुर्माना या औपचारिकता? टीआरएन प्लांट पर कार्रवाई के बाद उठे बड़े सवाल”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़।
घरघोड़ा क्षेत्र में संचालित टीआरएन एनर्जी पावर प्लांट एक बार फिर पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को लेकर कठघरे में है। फ्लाई ऐश (राख) के असुरक्षित परिवहन पर पर्यावरण विभाग ने कार्रवाई करते हुए 68,445 रुपये का जुर्माना तो लगा दिया, लेकिन इस कार्रवाई ने जितने जवाब दिए, उससे कहीं अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर अब चर्चा जुर्माने की राशि को लेकर भी हो रही है। लोगों का कहना है कि करोड़ों के कारोबार वाले औद्योगिक प्रतिष्ठान के लिए यह रकम महज “औपचारिकता” से ज्यादा नहीं लगती। कुछ लोग तंज कसते हुए इसे “जुर्माना कम, चंदा ज्यादा” तक कह रहे हैं।
दरअसल, प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश का उपयोग भारतमाला सड़क परियोजना में किया जा रहा है। इसके लिए रोजाना भारी वाहन घरघोड़ा से छाल–हाटी मार्ग पर आवाजाही करते हैं। आरोप है कि इन वाहनों में अधिकांशतः राख को ढकने के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए गए थे। नतीजा यह हुआ कि सड़क पर उड़ती राख ने आसपास के गांवों और बस्तियों को प्रदूषण की चपेट में ले लिया।
ग्रामीणों की शिकायतें अब केवल असुविधा तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं में बदल चुकी हैं। लोगों का कहना है कि हवा में घुलती राख के कारण सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य समस्याएं बढ़ रही हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद हालात में सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद विभाग को हस्तक्षेप करना पड़ा।
हालांकि, विभागीय कार्रवाई के बाद भी यह सवाल कायम है कि क्या इतनी छोटी राशि का जुर्माना वास्तव में किसी बड़े औद्योगिक इकाई को नियमों के पालन के लिए मजबूर कर पाएगा? या फिर यह केवल कागजी सख्ती बनकर रह जाएगी?
विशेषज्ञ मानते हैं कि पर्यावरणीय उल्लंघनों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि सख्त निगरानी, बार-बार निरीक्षण और जरूरत पड़ने पर संचालन पर रोक जैसी ठोस कार्रवाइयों की आवश्यकता होती है।
फिलहाल, प्रशासन ने इसे सख्त संदेश बताया है, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि सड़क पर उड़ती राख अब भी लोगों के गले में अटक रही है—और जवाबदेही का सवाल हवा में ही तैर रहा है।
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