जंगल से गांव तक बढ़ता कदम: रायगढ़ में 51 हाथियों का महादल, ड्रोन निगरानी में वन विभाग, ग्रामीणों में सतर्कता और भय का माहौल

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 14 मई।
जिले के धर्मजयगढ़ वनमंडल में एक बार फिर हाथियों की बड़ी मौजूदगी ने वन अमले और ग्रामीणों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। छाल परिक्षेत्र में करीब 51 हाथियों का विशाल दल देखे जाने की पुष्टि हुई है, जिसे वन विभाग और ‘हाथी मित्र दल’ ने ड्रोन कैमरे की मदद से ट्रैक किया है। इस दल में 12 नर, 33 मादा और 6 शावक शामिल बताए जा रहे हैं, जो इसे और संवेदनशील बना देता है।
वन विभाग के अनुसार, यह दल बीती रात बुढ़ादेव मंदिर छाल-नावापारा मार्ग के आसपास सक्रिय रहा। हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए विभाग ने तत्काल अलर्ट जारी कर आसपास के गांवों—नावापारा, बांधापाली, छाल और गड़ईनबहरी—के ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खासतौर पर गड़ईनबहरी-छाल कच्ची मार्ग और कांसाबहर-छाल मार्ग पर रात के समय अनावश्यक आवागमन से बचने को कहा गया है।
स्थानीय ग्रामीणों में इस बड़े दल की मौजूदगी को लेकर स्वाभाविक दहशत देखी जा रही है। पिछले कुछ समय में जिले के विभिन्न इलाकों में हाथियों के उत्पात, फसलों को नुकसान और जनहानि की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिसके चलते लोग किसी भी अप्रिय स्थिति को लेकर आशंकित हैं।
वन विभाग के अधिकारी लगातार इस दल की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। ड्रोन निगरानी के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी टीमों को तैनात किया गया है, ताकि हाथियों की लोकेशन का सटीक पता चलता रहे और समय रहते गांवों को अलर्ट किया जा सके। विभाग का कहना है कि हाथियों के दल को किसी भी प्रकार से उकसाने या उनके करीब जाने से बचना बेहद जरूरी है, क्योंकि शावकों की मौजूदगी में झुंड अधिक आक्रामक हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के मौसम में जल और भोजन की तलाश में हाथियों का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करना सामान्य व्यवहार है, लेकिन यह स्थिति मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी जन्म देती है। ऐसे में वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना ही सुरक्षा का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।
फिलहाल, प्रशासन और वन अमला पूरी तरह सतर्क है। आने वाले दिनों में हाथियों का यह दल किस दिशा में आगे बढ़ेगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि किसी भी गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
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